September 4, 2026
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बिहार के भागलपुर में लोकतंत्र के अनोखे चेहरे और ‘धरती पकड़’ के नाम से प्रसिद्ध नागरमल बाजोरिया का गुरुवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. सुजागंज मुख्य बाजार के निवासी बजोरिया पिछले कई दशकों से चुनाव लड़ने के लिए देशभर में चर्चित रहे. उन्होंने 281 चुनाव लड़े, लेकिन एक भी चुनाव नहीं जीते. इसके बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी अटूट आस्था और सामाजिक मुद्दों को उठाने की उनकी शैली ने उन्हें खास पहचान दिलाई. भागलपुर के लोगों के बीच वह केवल चुनावी उम्मीदवार नहीं, बल्कि समाजसेवा और जनजागरण का प्रतीक माने जाते थे. नागरमल बाजोरिया का नाम भारतीय चुनावी इतिहास के सबसे अनोखे उम्मीदवारों में गिना जाता है. उन्होंने अपने जीवन में कुल 281 चुनाव लड़े, लेकिन कभी जीत हासिल नहीं कर सके. चुनाव में हार को लेकर उनका एक मशहूर कथन था, ‘मैं चुनाव नहीं हारता, जनता हार जाती है.’ यही वाक्य उन्हें आम उम्मीदवारों से अलग बनाता था. उनका चुनावी सफर नगर निगम के चुनावों से शुरू होकर लोकसभा चुनावों और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचा. वे कई बड़े नेताओं के खिलाफ भी मैदान में उतर चुके थे. बजोरिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ा. इनमें इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नाम शामिल हैं. उनकी पहली बड़ी चुनावी चुनौती वर्ष 1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वी.वी. गिरि के खिलाफ रही. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए भी कई बार नामांकन किया. बताया जाता है कि उन्होंने इन दोनों पदों के लिए कुल 18 बार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई. उनका अंतिम और 281वां चुनाव वर्ष 2019 में था.
अविभाजित भारत के लाहौर में जन्मे नागरमल बाजोरिया 1930 के दशक में भागलपुर आ गए थे. यहां उन्होंने सुजागंज बाजार में अपना कारोबार स्थापित किया और धीरे-धीरे सामाजिक कार्यों से जुड़ गए.

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