June 16, 2026
image (2)

सीमांचल एक्सप्रेस में सीट विवाद को लेकर शुरू हुआ मामला सोमवार को फारबिसगंज पहुंचते-पहुंचते बड़े बवाल में तब्दील हो गया। ट्रेन में यात्री दंपति के साथ हुई मारपीट के विरोध में आक्रोशित लोगों ने फुलवरिया हाट के समीप ट्रेन को रोक दिया। इस दौरान पथराव, हंगामा और पैंट्रीकार में लूटपाट की घटनाएं की। हालात इतने बिगड़ गए कि पैंट्रीकार के कर्मी अपनी जान बचाने के लिए शौचालयों तथा अन्य डिब्बों में सीटों के नीचे छिपने को मजबूर हो गए। करीब डेढ़ घंटे तक सीमांचल एक्सप्रेस रुकी रही, जिससे रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ। घटना की शुरुआत रविवार को उत्तर प्रदेश के मुगल सराय में हुई बताई जा रही है। फारबिसगंज के ढोलबज्जा निवासी नुसरत प्रवीण ने आरोप लगाया कि वे बीएड प्रवेश परीक्षा देकर अपने पति अबू समा के साथ सीमांचल एक्सप्रेस से लौट रही थीं। आरक्षित टिकट नहीं मिलने के कारण दोनों जनरल कोच में सवार हुए। आरोप है कि उस कोच में पैंट्रीकार स्टाफ ने सीटों पर कब्जा जमा रखा था। सीट को लेकर हुए विवाद के बाद कर्मचारियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उनके पति अबू समा की लोहे की रड, हथौड़ी और अन्य सामान से बेरहमी से पिटाई कर दी गई। घटनास्थल पर बीच-बचाव करने पहुंचे उनके रिश्तेदार मोहम्मद बरकत और मोहम्मद रहमत अली को भी कथित रूप से पीटा गया, जिससे वे घायल हो गए। नुसरत प्रवीण ने घटना की जानकारी परिजनों को दी। जैसे ही सीमांचल एक्सप्रेस फारबिसगंज पहुंची और जोगबनी की ओर रवाना हुई, फुलवरिया हाट के समीप आक्रोशित लोगों व परिजनों ने ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने ट्रेन पर पथराव किया तथा पैंट्रीकार में घुसकर पानी की बोतलें और अन्य सामान उठा लिए। पैंट्रीकार के कई आरोपी कर्मियों ने खुद को शौचालयों और अन्य डिब्बों में छिपाकर जान बचाई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फारबिसगंज एसडीपीओ राजकिशोर कुमार, फारबिसगंज थाना अध्यक्ष मनोज कुमार तथा भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस और आरपीएफ ने काफी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया। इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों को भी भीड़ से धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, आरपीएफ कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर भीड़ को यात्री डिब्बों में घुसने से रोके रखा, जिससे बड़ी घटना टल गई। इस मौके पर सहयोग के लिए समाज सेवी रमेश सिंह के अलावा सीटीआई रविंद्र कुमार ,एसएम केएन साह सहित सभी रेल कर्मी मौजूद थे। रेल यात्री संघ के सदस्य चंदन कुमार भगत ने भी घटनास्थल पर रेल प्रशासन की भरपूर मदद की। आक्रोशित लोगों की मांग पर ट्रेन में छिपे छह पैंट्रीकार कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया और जीआरपी को सौंप दिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गोपी (पिता- पूरनलाल, सुभाष नगर, बरेली), गौरव सिंह (पिता- विनोद सिंह, माधवगढ़, जालौन), सुरेंद्र कुमार (पिता- राम खिलाड़ी, टूंडला, फिरोजाबाद), सर्वेश कश्यप (पिता- प्यारेलाल, लहरा, कासगंज), अजीत कश्यप (पिता- प्रेम प्रकाश, पंच बिहार, अलीगढ़) तथा राजकुमार (पिता- गेंदालाल, फिरोजाबाद) के रूप में हुई है।
एसडीपीओ राजकिशोर कुमार ने बताया कि ट्रेन रोके जाने और उपद्रव की सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर जीआरपी को सौंप दिया गया है। मामले की जांच रेलवे और जीआरपी द्वारा की जा रही है।
आरपीएफ प्रभारी उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कि हालात बेहद तनावपूर्ण थी। भीड़ को यात्री बोगियों में प्रवेश से रोकने के दौरान जवानों को काफी धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया। वहीं जोगबनी जीआरपी थाना अध्यक्ष जीत नारायण हेम्ब्रम ने बताया कि गिरफ्तार छहों आरोपियों को जोगबनी लाया जा रहा है। मामले की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है। साथ ही ट्रेन को लंबे समय तक रोककर उपद्रव मचाने के मामले को भी गंभीरता से लिया गया है। घटना के बाद रेल यात्रियों में दहशत का माहौल है। एक ओर यात्री दंपति और उनके परिजन पैंट्रीकार कर्मियों पर जानलेवा हमले का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रेन रोककर हुए उपद्रव और पथराव ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जीआरपी और रेलवे प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *