भारतीय रेलवे के सिग्नल व दूरसंचार (एसएंडटी) विभाग के कर्मचारियों ने अलग-अलग लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है. कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड व केन्द्र सरकार के समक्ष 9 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए कार्य परिस्थितियों में सुधार, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने व वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि रेलवे संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में सिग्नल व दूरसंचार विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं. आधुनिक तकनीकों के विस्तार के साथ कार्यभार लगातार बढ़ा है, जबकि विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं. मांग पत्र में सभी एसएंडटी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की नियमित शिफ्ट ड्यूटी लागू करने की मांग की. साथ ही, ऑफ-ड्यूटी कर्मचारियों को घर से बुलाकर खराबी दूर कराने की व्यवस्था समाप्त करने पर जोर दिया गया है. कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से श्रम नियमों का उल्लंघन होता है और कर्मचारियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव पड़ता है।
यूनियन ने प्रत्येक एसएसई यूनिट में रात्रिकालीन खराबी सुधार दल (नाइट ड्यूटी फेल्योर रेक्टिफिकेशन गैंग) गठित करने की भी मांग की है, ताकि रात के समय अकेले कार्य करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके अलावा, ट्रैक पर कार्य करने वाले एसएंडटी कर्मचारियों को भी ट्रैक मेंटेनर और पॉइंट्समैन की तरह रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस प्रदान करने की मांग उठाई गई है।
कर्मचारियों ने एचओईआर-2005 के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने तथा सिग्नल इंजीनियरिंग मैनुअल में संशोधन कर आपातकालीन कार्यों के लिए केवल ड्यूटी पर तैनात तकनीशियनों को अधिकृत करने की मांग की है. आगामी 8वें वेतन आयोग के संदर्भ में कर्मचारियों ने विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव भी रखा है. इसके तहत सिग्नल और टेलीकॉम विभाग के विभिन्न तकनीशियन ग्रेडों का विलय कर नए कैडर बनाने, सहायक तकनीशियनों को उच्च वेतन स्तरों में पदोन्नत करने तथा जूनियर इंजीनियर (जेई) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) के वेतनमान में सुधार की मांग की गई है. कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि रिक्त पदों को शीघ्र नहीं भरा गया और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर तेज किया जाएगा।
