राजधानी में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क के तेज विस्तार के लिए गेल के साथ जिला प्रशासन भी मुस्तैदी दिखा रहा है। बावजूद इसके यदि उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने की मौजूदा रफ्तार रही तो कम से कम सभी घरों तक कनेक्शन पहुंचाने में 15 वर्ष से अधिक लग जाएंगे। पटना नगर निगम क्षेत्र में पांच लाख से अधिक घर चिह्नित हैं। वहीं, राजधानी में मकान बनने की गति 10 प्रतिशत से अधिक है। गैस संकट के बाद जिला प्रशासन ने ज्यादा से ज्यादा घरों में जल्द कनेक्शन के लिए अभियान चलाया है। बावजूद इसके पिछले तीन माह से प्रतिदिन औसतन 82 कनेक्शन दिए जा रहे हैं। गेल इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 10 मार्च से 20 जून के बीच 100 दिनों में 8,230 घरों में पीएनजी कनेक्शन दिए गए। यानी प्रतिदिन औसतन करीब 82 कनेक्शन दिए जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में पांच लाख घरों का अनुमान है। इनमें से पहले से 29,570 घरों में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध थे, जो अब बढ़कर 37,800 से अधिक हो गए हैं। यानी वर्तमान में भी 4.62 लाख घर ऐसे हैं, जहां अभी पीएनजी कनेक्शन नहीं पहुंचा है। यही गति बनी रहती है तो शेष घरों तक कनेक्शन पहुंचाने में 5,630 दिन यानी 15 वर्ष छह महीने का समय लग जाएगा। यदि कंपनी अतिरिक्त एजेंसियों की नियुक्ति कर मैनपावर बढ़ाती है तो यह लक्ष्य जल्द पूरा किया जा सकता है। वर्तमान में कई इलाकों में घरों के सामने से पाइपलाइन गुजर रही है, फिर भी लोग महीनों से कनेक्शन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। राजीवनगर, केसरीनगर, इंद्रपुरी, एजी कालोनी, सीडीए कालोनी, शास्त्रीनगर, जगदेव पथ, बोरिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड, दीघा, पाटलिपुत्र और नेहरू नगर समेत कई इलाकों के लोगों का कहना है कि आवेदन और दस्तावेज जमा करने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।
गेल इंडिया के अनुसार, पहले चयनित कुछ एजेंसियों के अपेक्षित कार्य नहीं करने और पर्याप्त तकनीकी कर्मियों की कमी के कारण कनेक्शन देने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध हो तो पिछले तीन महीनों में 15 हजार से अधिक कनेक्शन दिए जा सकते थे।
गेल इंडिया के महाप्रबंधक एके सिंह ने बताया कि नए मैनपावर और एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होते ही लंबित आवेदनों का तेजी से निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 30 जून तक घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। एकमुश्त मीटर लेने वालों को केवल मीटर शुल्क देना होगा, जबकि मासिक किराया योजना में 50 रुपये प्रतिमाह मीटर रेंट देना पड़ता है।
