पीएमसीएच के माइक्रोबायोलाजी विभाग में सोमवार को लगी आग के कारणों की मंगलवार को जांच की गई। प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह के साथ अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने जांच में पाया कि करीब 20 वर्षाें से विभाग का समुचित रखरखाव नहीं हो रहा था। टीम ने रखरखाव संबंधी कई गंभीर खामियां पकड़ीं।
लैब व विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष में तीन से चार बार यहां शार्ट सर्किट, तारों से चिंगारी निकलने व धुआं उठने जैसी घटनाएं होती थीं। इसे देखते हुए विभाग में नई वायरिंग व व्यापक मरम्मत कराने का निर्णय लिया है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार माइक्रोबायोलाजी विभाग में एचआइवी समेत 45 प्रकार की जांचें होती हैं। हर दिन यहां विभिन्न विभागों से 60 से 70 सैंपल जांच के लिए आते हैं। इन्हें पहले निर्धारित तापमान में सुरक्षित रखा जाता है।
आग में एसी व रेफ्रिजरेशन व्यवस्था प्रभावित होने से सैंपलों के सुरक्षित भंडारण नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है क्योंकि पूरी व्यवस्था बिहार एड्स कंट्रोल सोसायटी संचालित करता है। घटना के 24 घंटे बाद भी विभाग में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। ऐसे में सुरक्षित बचे एचआइवी सैंपलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। लैब तकनीशियन अभय कुमार ने बताया कि इन सैंपलों को माइनस 21 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है, लेकिन बिजली नहीं रहने से उनके सुरक्षित रहने पर संकट उत्पन्न हो गया है। माइक्रोबायोलाजी विभाग में जहां विभिन्न रोगों के सैंपलों की जांच की जाती है, वहीं पीजी छात्रों को भी यहां व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। आग लगने से कई मशीनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे जांच कार्य के साथ-साथ शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
आग लगने से विभाग की कई मशीनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मरम्मत कार्य शुरू है लेकिन व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा। बिहार एड्स कंट्रोल सोसायटी को घटना की रिपोर्ट भेज दी गई है। सैंपल जांच में कुछ देरी हो सकती है। आग के कारण स्थगित हुई पीजी छात्रों की प्रायोगिक परीक्षा अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी। -डॉ. प्रतुल्य नंदन विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलाजी विभाग पीएमसीएच
