उपचुनाव के लिए मतदान से महज 48 घंटे पहले बंगाल का राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मतदाताओं से भाजपा के साथ जुड़कर देश और राज्य के विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की पुरजोर अपील की है। हालांकि, अपने संबोधन के दौरान अपराध और पुलिस-प्रशासनिक मामलों में अल्पसंख्यकों की मौजूदगी को लेकर की गई उनकी एक टिप्पणी ने नया सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है।
दिलीप घोष ने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग देश की प्रगति, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरियों और व्यापारिक अवसरों का पूरा लाभ उठाएं। इसके साथ ही उन्होंने विवादास्पद टिप्पणी जोड़ते हुए कहा कि आज अदालतों और थानों में अपराधियों के तौर पर अल्पसंख्यकों की उपस्थिति दिखती है, जिसे भाजपा खत्म कर उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहती है। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी रेजिनगर में मुस्लिम मतदाताओं से भाजपा का हाथ थामने का आह्वान करते हुए कहा था कि उनके पास दोस्ती का इससे बेहतर मौका नहीं होगा।
भाजपा नेताओं के इन बयानों को दोनों सीटों के सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। रेजिनगर में लगभग 65′ और नंदीग्राम में करीब 26′ मुस्लिम आबादी है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इस पर करारा पलटवार किया है। टीएमसी नेता वैश्वानर चट्टोपाध्याय ने कहा कि जो भाजपा नेता हमेशा अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगलते थे, वे अब हार के डर से हाथ जोड़कर वोट मांगने पर मजबूर हो गए हैं। उन्होंने मांग की कि भाजपा को वोट मांगने से पहले अपने पुराने बयानों के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। मतदान से ठीक पहले इस जुबानी जंग ने चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।
