जमशेदपुर कांफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के ‘ट्रांसफॉर्मिंग मैन्युफैक्चरिंग: लीडरशिप, टेक्नोलॉजी व ग्रीन ग्रोथ’ थीम के तहत झारखंड मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव क आयोजन किया गया. इस मौके पर झारखंड इंडस्ट्रीयल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने कहा कि झारखंड अपने औद्योगिक बदलाव के एक अहम पड़ाव पर है और पूर्वी भारत में एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की अच्छी स्थिति में है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षमता को हासिल करने के लिए राज्य के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के मकसद से इंडस्ट्री, सरकार, एकेडेमिया और अन्य स्टेकहोल्डर्स के बीच एक साझा सोच और मिलकर काम करने की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक जमीन की उपलब्धता, भरोसेमंद बिजली, कुशल लॉजिस्टिक्स व मजबूत एमएसएमई सप्लाई चेन के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए इनका होना बहुत जरूरी हैं।
सीआईआई की ओर से आयोजित मैन्यफैक्चरिंग कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया. इस कॉन्क्लेव में इंडस्ट्री लीडर्स, सरकारी प्रतिनिधि, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स, एकेडेमिया और पॉलिसी मेकर्स एक साथ आए ताकि मैन्युफैक्चरिंग के बदलते परिदृश्य और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्रीज़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई. चर्चाओं में मैन्युफैक्चरिंग में उत्कृष्टता, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंडस्ट्री 4.0 को अपनाने, सक्षम ऑपरेशन्स, सस्टेनेबिलिटी, औद्योगिक विकास के मुख्य कारकों के रूप में मंथन किया गया।इस मौके पर जियाडा के प्रबंध निदेशक वरण रंजन ने कहा कि मैन्युफैैक्चरिंग में लगातार विकास इनोवेशन, टेक्नोलॉजी को अपनाने, सस्टेनेबिलिटी और लागत में कुशलता पर निर्भर करेगा, साथ ही उन्होंने इंडस्ट्री, रिसर्च संस्थानों, स्टार्टअप्स और एमएसएमइ के बीच जयादा सहयोग पर जोर दिया. उन्होंने औद्योगिक विकास के प्रति झारखंड सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते निवेश, इनोवेशन और लंबे समय तक चलने वाले विकास को बढ़ावा देने के मकसद से पॉलिसी में सुधार, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास व इंडस्ट्री के साथ सक्रिय जुड़ाव के लिए चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
इंडस्ट्री स्मार्ट, टेक्नोलॉजी-संचालित व पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाएं अपनाएं: पारिख
सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन व वैदेही मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर दिलू बिपिन पारिख ने कहा कि झारखंड के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भविष्य का विकास व प्रतिस्पर्धात्मकता इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और रणनीतिक नेतृत्व को अपनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इंडस्ट्रीज़ को पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से आगे बढक़र स्मार्ट, टेक्नोलॉजी-संचालित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाना होगा. उन्होंने कहा कि रिसर्च और डेवलपमेंट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने झारखंड को न केवल एक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में, बल्कि इनोवेशन और एडवांस्ड इंजीनियरिंग के केंद्र के रूप में भी स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. टाटा टाटा मोटर्स लिमिटेड में प्लांट हेड ऑपरेशन्स अनुराग छारिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि औद्योगिक विकास का अगला चरण, या मैन्युफैक्चरिंग 4.0, टेक्नोलॉजी को अपनाने, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, सस्टेनेबिलिटी और निरंतर इनोवेशन की संस्कृति से आकार लेगा. उन्होंने मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए इंडस्ट्री, सरकार, एकेडेमिया और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के बीच गहरे सहयोग का आह्वान किया।
सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के केन्द्र में होना जरूरी: रामम टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट सर्विसेेज व सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के वाइस चेयरमैन डी बी सुन्दर रामम ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य ऐसी दूरदर्शी लीडरशिप से तय होगा जो तेजी से बदलते ग्लोबल मार्केट की उम्मीदों को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन को प्रभावी ढंग से मिलाती हो. भारत के विकसित अर्थव्यवस्था बनने व राष्ट्रीय जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान बढ़ाने के लक्ष्य के बारे में जानकारी देेते हुुए उन्होंने भविष्य की ग्रोथ के लिए झारखंड के मज़बूत इंडस्ट्रियल बेस और भरपूर मिनरल रिसोर्स को अहम बताया. उन्होंने राज्य को मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर मज़बूत बनाने के लिए लगातार इन्वेस्टमेंट, मज़बूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और रणनीतिक लॉन्ग-टर्म प्लानिंग की ज़रूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के केंद्र में होनी चाहिए।
