August 11, 2026
images

बिहार के गांवों में जमीन से जुड़े विवादों को कम करने के उद्देश्य से चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब तेजी पकड़ रहा है। सरकार का मानना है कि सर्वे पूरा होने के बाद जमीन के रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएंगे। इससे जमीन के मालिकाना हक की स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही वर्षों से चले आ रहे विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने क्षेत्रफल के लिहाज से राज्य के पांच छोटे जिलों जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्यों की समीक्षा की। सरकार ने इन जिलों में 15 अगस्त तक सर्वे का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए संबंधित कर्मचारियों को अन्य अभियानों से अलग रखा गया है।

मंत्री ने कहा कि जमीन से जुड़े विवादों के चलते बड़ी संख्या में मामले थानों तक पहुंचते हैं। ऐसे में विशेष भूमि सर्वे पूरा होने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। समीक्षा के दौरान कुछ मौजों के जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर मंत्री ने नाराजगी जताई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

सर्वे से जुड़े रिकॉर्ड को पोर्टल पर तत्काल अपलोड करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए लेवल-7 के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इसके बाद पूरे कार्य की 10 दिन बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी।

परिवार में जमीन का आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो भी भूमि सर्वे का काम नहीं रुकेगा। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड उसी पूर्वज के नाम पर दर्ज रहेगा, जिसके नाम पर वह पहले से दर्ज है।

भूमि सर्वे की प्रक्रिया चार प्रमुख चरणों किस्तवार, खानापुरी, सुनवाई और लगान बंदोबस्ती के तहत पूरी की जाती है। सबसे पहले गांव की सीमा और नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद जमीन के मालिक की पहचान कर कच्चा खतियान तैयार होता है। रैयतों को नक्शा और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराकर आपत्तियां मांगी जाती हैं। आपत्तियों और दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम खतियान प्रकाशित किया जाता है।

भूमि सर्वे में पुराने खतियान की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य के करीब 45 हजार गांवों में लगभग 8 हजार गांवों के पुराने कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में रैयतों से स्वघोषणा के माध्यम से जमीन से जुड़ी जानकारी ली जा रही है। जमीन का विवरण ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से जमा करने की सुविधा दी गई है।

बिहार में करीब 90 साल बाद व्यापक स्तर पर भूमि सर्वे कराया जा रहा है। पहले चरण में यह काम वर्ष 2019 से शुरू हुआ था, जिसकी समयसीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है। अब पूरे राज्य में भूमि सर्वे पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2027 निर्धारित किया गया है।

बिहार में करीब 1.82 करोड़ रैयत हैं। सरकार को उम्मीद है कि विशेष भूमि सर्वे पूरा होने के बाद जमीन के रिकॉर्ड आधुनिक, व्यवस्थित और पारदर्शी होंगे। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *