बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में शुक्रवार को वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूडीआरओ) की ओर से 13वें हस्तकरघा दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज जरूरत केवल हस्तकरघा उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि बुनकरों की आय में वृद्धि करने की है। इसके लिए नए डिजाइन, ई-कॉमर्स, कौशल उन्नयन और युवाओं की भागीदारी जरूरी है। राज्यपाल ने कहा कि नई पीढ़ी यदि हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़ेगी तो इस पारंपरिक उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और उद्योग जगत को मिलकर बुनकरों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हस्तकरघा केवल कपड़ा बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने झारखंड में हस्तशिल्प और हस्तकरघा के विकास की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले तसर रेशम के कोकून पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने बुनकरों की समस्याओं को नजदीक से देखा और समझा है। उन्होंने बताया कि जब वे केंद्र सरकार में कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस घोषित किया था।
पूंजी और बाजार की कमी बड़ी चुनौती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खादी ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व सदस्य मनोज कुमार सिंह ने कहा कि हस्तकरघा क्षेत्र के सामने पूंजी, आधुनिक तकनीक, डिजाइनिंग और बाजार तक आसान पहुंच की कमी जैसी कई चुनौतियां हैं। इन समस्याओं के कारण बुनकर धीरे-धीरे इस पारंपरिक व्यवसाय से दूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में 50 लाख से अधिक लोग हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े हैं और वैश्विक हस्तकरघा उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत में होता है। सूती, रेशम और ऊनी हस्तकरघा उत्पादों की देश के साथ-साथ विदेशों में भी मांग है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने कहा कि बुनकरों के हुनर को प्रोत्साहित करने के साथ सरकार और उद्योग जगत को मिलकर हस्तकरघा क्षेत्र के लिए आधारभूत संरचना विकसित करनी चाहिए। ई-कॉमर्स के माध्यम से हस्तकरघा उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है। डब्ल्यूडीआरओ के अध्यक्ष विजय भारती ने कहा कि संगठन पिछले 15 वर्षों से बुनकरों के विकास और हस्तकरघा क्षेत्र के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद बुनकरों को प्रशिक्षण देने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में आयोजन का मुख्य उद्देश्य तसर रेशम उत्पादन से अधिक से अधिक बुनकरों को जोड़ना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रम मंत्रालय बोर्ड के पूर्व सदस्य आनंद साहू के स्वागत भाषण से हुई। मंच संचालन विजय भारती ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्वर्णरेखा विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी आशुतोष राय ने किया। इस अवसर पर समाजसेवी दीपक पटेल भी मंच पर उपस्थित रहे। समारोह के अंत में राज्यपाल ने बलराम पात्रो, मंगल पात्रो, अमित मोदक, अनिता मैत्रे और बिलाय तांती को सम्मानित किया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा, स्वदेशी जागरण मंच के बंदेशंकर सिंह, अमित मिश्रा, पंकज सिंह, राजपति देवी, डॉ. अनिल राय, किरणजीत कौर, आभा देवी, गुरजीत सिंह, अभिषेक बजाज, घनश्याम चौधरी, नीरज मिश्रा, दिलीप त्यागी, रंजीत दास, दुलाल स्वांसी और रामप्रसाद दास समेत झारखंड तथा पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से आए प्रतिनिधि मौजूद थे।
