October 9, 2026
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है। इसका कारण यह है कि उनकी आवाज यहां सुनी जाती है और उनके अनुभव का सम्मान होता है। साथ ही समाधान उनके लिए नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर बनाए जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने आज भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर वार्ता के लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आयोजित सत्र में अपने स्वागत भाषण में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शक्ति उसकी विविधता और सहयोग में है। ऐसे में विविधता ही हमारी पहचान बननी चाहिए, सहयोग ही हमारी प्रेरणा बनना चाहिए और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “आज यह सभागार अलग अलग महाद्वीपों, संस्कृतियां और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है।”

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने चार स्तंभों के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के सभी प्रयास लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के पर केंद्रित रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सामान्य मानवी के जीवन पर उसका बहुत ही निगेटिव और व्यापक प्रभाव हो रहा है। महामारियां, क्लाइमेट डिजास्टर्स और सप्लाई चेन डिस्ट्रप्शन ने दिखाया है कि आज के इंटर-कनेक्टेड वर्ल्ड में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समिट में रिजिलियंस बढ़ाने पर विशेष बल दिया है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स में विकसित समाधानों का लाभ ग्लोबल साउथ तक पहुंचना चाहिए। इन समाधानों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ढालने के साथ सस्ता और आसानी से अपनाने योग्य बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। इसलिए संतुलित विकास का रास्ता अपनाना जरूरी है।

मोदी ने ब्रिक्स के तहत एमएसएमई पोर्टल, अर्बन मोबिलिटी हब, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण तथा ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलों को व्यापक स्तर पर पहुंचाकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए उपयोगी बनाया जाना चाहिए।

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