सिविल कोर्ट में सोमवार को फर्जी आइकार्ड के साथ पकड़े गए दो युवकों एवं मामले में संलिप्त एक अपर लोक अभियोजक को लहेरियासराय थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपितों में एपीएम थाना क्षेत्र के श्रीपुर बहादुरपुर निवासी एपीपी अशोक कुमार, बहेड़ी थाना के तुर्की निवासी विकास कुमार यादव एवं सदर थाना के तेलहन लक्ष्मीपुर निवासी मनोज कुमार यादव शामिल हैं। जबकि इस मामले में सात को आरोपित किया गया है। अन्य आरोपितों में नईमुद्दीन मोबाइल नंबर-7903479464, देव मो. 8340457633, अजय उर्फ अमन मो.-7903124918 एवं 7484976784, आइकार्ड बनाने वाला दुकानदार शामिल है।
इस बाबत प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षक पीयूष कुमार के आवेदन पर कांड अंकित किया गया है। एपीपी समेत तीनों को पुलिस ने मंगलवार को सीजेएम जुनैद आलम के समक्ष प्रस्तुत किया। अभिलेख का अवलोकन के बाद सीजेएम ने दोनों कथित एमटीएस को 14 दिनों के लिए न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।वहीं एपीपी अशोक कुमार को सात दिनों की औपबंधिक जमानत प्रदान करते हुए मुक्त कर दिया।
प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली कि एडीजे-सात के न्यायालय में दो व्यक्ति फर्जी आइकार्ड के साथ पकडे गए हैं, जो पिछले कुछ दिनों से कोर्ट में अवैध रूप से प्रशिक्षण ले रहे थे।
पुलिस के पहुंचने पर दोनों युवक फर्जी आइकार्ड के साथ कोर्ट में मौजूद थे। उनके गर्दन में ब्लू रंग के फीता के सहारे लगा आइकार्ड पाया गया। दोनों आइकार्ड पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दरभंगा प्रिंट किया हुआ था।
जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर के जगह पर इंचार्ज रजिस्ट्रार सिविल कोर्ट दरभंगा का मोहर लगा था। कार्ड को जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी का हस्ताक्षर प्रिंट था।
पद की जगह मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) अंकित था। इनके पास दो मोबाइल बरामद किया गया। पूछताछ में मनोज ने बताया कि उसे देव के माध्यम से अजय उर्फ अमन से संपर्क हुआ। विकास ने बताया कि उसे नईमुद्दीन के माध्यम से अजय उर्फ अमन से संपर्क हुआ। यह फर्जी आइकार्ड बनाकर अजय उर्फ अमन ने दिया। बताया कि एपीपी अशोक कुमार द्वारा 23 जून 2024 से एडीजे-10 एवं एडीजे-सात के कोर्ट में मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में ट्रेनिंग दी गई। दोनों युवकों एवं एपीपी से कोर्ट में मल्टी टास्किंग स्टाफ के पद, आइकार्ड से संबंधित नियुक्ति पत्र की मांग की तो कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया। बताया गया कि फोन के माध्यम से ही ये तीनों देव, नईमुद्धीन, अजय उर्फ अमन के संपर्क में थे। उनके पास इस ट्रेनिंग अथवा नियुक्ति से संबंधित कोई कागजात नहीं है।
पुलिस ने जब कोर्ट प्रभारी मुकेश कुमार एवं डीएलएसए कार्यालय के कर्मी संजय कुमार से जानकारी ली तो बताया गया कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से ऐसा कोई आइकार्ड निर्गत नहीं हुआ है। कार्ड जारी करने वाले अधिकारी की जगह पर प्रिंट किया हुआ इंचार्ज रजिस्ट्रार सिविल कोर्ट दरभंगा का कोई पद यहां नहीं है। डीएलएसए की सचिव का हस्ताक्षर कोर्ट की बेवसाइट पर भी उपलब्ध है। लोक अदालत एवं विधिक सेवा के लिए आम लोगों को भेजे जाने वाले नोटिस पर भी उनका हस्ताक्षर होता है। उसी हस्ताक्षर को स्कैन कर के आइकार्ड पर कापी किया हुआ प्रतीत हो रहा है।
यह कार्य न्यायालय के विचारण कागजात की गोपनीयता, संवेदनशीलता भंग एवं दुरुपयोग करने, गंभीर कांडों के अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के दृष्टिकोण से किया गया है। जिसके लिए फर्जी तरीके से, आपराधिक षडयंत्र एवं अपराधियों के साथ साठगांठ कर फर्जी एवं अवैध आई कार्ड बनाकर अवैध कार्य किया गया।
दोनों युवकों से हुई थी छह-छह लाख की वसूली
बहेड़ी थाना के तुर्की निवासी विकास एवं मनोज के ग्रामीणों ने बताया कि दोनों युवकों से जालसाजों ने छह-छह लाख रुपये की वसूली की थी। विकास के पिता बीएमपी-13 से पांच साल पूर्व सेवानिवृत्त हुए हैं। विकास बीएड पास है।
