बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसने में बड़ी कामायाबी मिली है। निगरानी विभाग ने बांका जिला परिषद में संगठित तरीके से चल रहे भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इसमें जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव, सहायक अभियंता सुधीर कुमार, कनीय अभियंता मगरूफ और दो गैर लोकसेवक सहित सात लोगों पर प्राथमिकी (90/26) दर्ज कराई गई है। निगरानी अधिकारियों ने कार्यालय के निजी सहायक ओमप्रकाश मंडल और रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल को बांका डीडीसी कार्यालय कक्ष से 1.26 लाख रुपये घूस की रकम के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर किए गये काम के भुगतान सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं में रिश्वत लेने आरोप है। धोरैया फतुचक के अवध किशोर कुमार ने बांका जिला परिषद अध्यक्ष व दो अभियंता सहित पांच कर्मियों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें नाले के साथ पीसीसी सड़क निर्माण कार्य का बिल भुगतान के एवज में घूस की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया। इसके सत्यापन में जानकारी मिली कि सरकारी व गैर सरकारी कर्मियों द्वारा संगठित तरीके से रिश्वत की वसूली की जा रही है। जिप अध्यक्ष राजेंद्र यादव, सहायक अभियंता सुधीर कुमार, कनीय अभियंता मगरूफ, निजी सहायक ओमप्रकाश मंडल, रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल सहित दो अन्य गैर लोकसेवकों पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई की गई। बांका जिला परिषद कार्यालय में सोमवार दोपहर हुई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई में रिश्वतखोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए ओमप्रकाश मंडल और जागेश्वर मंडल करीबी रिश्तेदार हैं, ओमप्रकाश सेवानिवृत हो चुके कनीय अभियंता हैं,जबकि जागेश्वर मंडल रात्रि प्रहरी के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन दोनों का ही काम योजनाओं का मेजरमेंट बुक बनाना था,चूंकि बांका जिप कार्यालय में वर्तमान में दो कनीय अभियंता पदस्थापित हैं और कार्य अधिक होने के कारण दोनों ही जेई अपना काम अनुभवी ओमप्रकाश मंडल और उनके नजदीकी रिश्तेदार जागेश्वर मंडल से ही कराते थे। टेंडर के माध्यम से हुए सभी योजनाओं में संवेदकों से वसूली करके अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और अन्य ऑफिस स्टॉफ तक इन्हीं दोनों के माध्यम से सबके आनुपातिक हिस्से पहुंचाए जाते थे,ऐसी चर्चा इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद चौक चौराहों पर सरेआम देर शाम तक होती रही। विजयनगर चौक पर एक चाय दुकान में कुछ जनप्रतिनिधियों ने चर्चा करते हुए बताया कि चाहे जिला परिषद के अध्यक्ष और सदस्य कोई भी हो, कार्यपालक पदाधिकारी कोई भी रहे,पूरे कार्यालय में सिक्का केवल और केवल ओमप्रकाश मंडल का ही चलता था। उन्होंने अपनी नौकरी यहीं से शुरुआत की थी और रिटायर भी बांका जिले में ही हुए। हालांकि सेवानिवृत्ति होने के कुछ दिनों पुर्व इन्होंने अपना तबादला रजौन प्रखंड में करवा लिया था,लेकिन रसूख ऐसा कि उस कार्यकाल में भी इन्होंने जिला परिषद कार्यालय को नहीं छोड़ा था। यहां तक कि रिटायर होने के बाद भी स्वयं प्रशासक की अनुमति लेकर जिप कार्यालय में डटे रहे है और अपने साथ साथ अपने एक रिशतेदार को भी प्राइवेट से ऑफिस बॉय के रूप में कार्यालय में काम दिला दिया था। कई संवेदक और कभी कभार ऑफिस जाने वाले आमजन ओमप्रकाश मंडल के रिश्तेदार को भी जेई साहेब ही समझते थे,कारण की सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान फाइलों की देखरेख से लेकर प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति दिलाने से फाइनल पेमेंट कराने तक का जिम्मा इनके रिश्तेदार के पास ही होता था। जो कि संवेदकों से अपने हिस्से के साथ साथ सभी पाटीदारों के हिस्से की कमीशन वसूली करने के बाद ही अपने घर से फाइल लाकर कार्यालय में काम करवाता और संवेदकों को कागजात देता था। हालांकि कुछ दिन पुर्व यहां पदस्थापित सहायक कार्यपालक पदाधिकारी ने इन दोनों ही बाप रिश्तेदार को कार्यालय आने से मना किया तो इनके पक्ष में कई अध्यक्ष समेत कई अन्य नेता और जिप सदस्य उतर आए और कहने लगे कि रिटायरमेंट के बाद घर में मन नहीं लगता होगा,यहां आते हैं तो मन बहलने के साथ साथ कुछ काम में भी हाथ बंटा देते हैं। बांका में हुई विजिलेंस टीम के धावा दल की छापेमारी के बाद ऑफिस के आसपास काफी देर तक हड़कंप मच गया। पीसीसी सड़क और नाली के टेंडर वर्क का काम पूरा होने पर उसके पेमेंट के बदले लिया गया एक लाख 26 हजार रिश्वत के रकम को गिनते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने पर गिरफ्तार हुए जागेश्वर मंडल और ओमप्रकाश मंडल को अभिरक्षा में लेकर सर्किट हाउस से टीम देर शाम पटना रवाना हुई। इधर,बांका थाना पुलिस के सहयोग से दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम पटना के लिए रवाना होने लगी, तब धावा दल प्रभारी सह कांड के अनुसंधानकर्ता डीएसपी सत्येंद्र राम ने पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि धोरैया प्रखंड के फत्तुचक गांव निवासी संवेदक अवध किशोर (पिता- स्व० बूटन मंडल) ने कुर्मा पंचायत के फत्तुचक गांव में पीसीसी सड़क एवं नाली निर्माण का कार्य कराया था।
इस योजना की कुल प्राक्कलित राशि 7 लाख 29 हजार 27 रुपये थी। डीएसपी सत्येंद्र राम ने बताया कि उक्त योजना के बिल को पास कर भुगतान की स्वीकृति दिलाने के एवज में संवेदक से कुल 1 लाख 26 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। जबकि संबंधित योजना का निर्माण कार्य जिला परिषद के कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता की देखरेख में गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया था। इसके बावजूद रिश्वत मांगे जाने से आहत संवेदक अवध किशोर ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप सही पाए जाने पर 30 जुलाई 2026 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 90/26 दर्ज किया गया। ओमप्रकाश मंडल का आवास आजाद चौक से सिविल सर्जन कार्यालय जाने वाली सड़क में एक मुहल्ले में हैं, आलीशान मकान के एक कमरे में केवल ऑफिस का ही डीलिंग इनके बेटे के द्वारा किया जाता था,हालांकि विजिलेंस की टीम ने दोनों की गिरफ्तारी करने के बाद आवास पर भी रेड की लेकिन कुछ नहीं मिला,जिसके बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि बड़ी देर कर दी सनम आते आते…क्योंकि जैसे ही जिप कार्यालय में रेड की सूचना मिली तो इतने देर में ही इनके शातिर बेटे ने सारा काला चिट्ठा समेट दिया होगा,क्योंकि गिरफ्तारी से लेकर निगरानी टीम के घर पहुंचने के बीच कई घंटों का फासला रहा,अगर एक साथ ऑफिस और आवास में छापेमारी शुरू की जाती तो और भी कई काले कारनामे उजागर होने की संभावना बनती।
कार्यालय के बाबू ने कहा कि असली खेल तो इनके आवास से चलता था, ऑफिस तो केवल नाम का ऑफिस था। शहर में कई जगहों पर कीमती भूखंड के साथ दूसरे शहरों में भी मकान खरीदने की चर्चा पूरे बाजार में गर्म है। हालांकि इस छापेमारी से कई लोग काफी खुश दिख रहे थेद् और नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कार्रवाई होना बहुत जरूरी था। जिसे भ्रष्ट आचरण इतना अधिक भा गया था कि नौकरी की सीमा समाप्त होने पर भी मोह भंग नहीं हो रहा था और नियमित रूप से 10-11 बजते ही रोजाना ऑफिस पहुंच जाते थे।
