भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में आयोजित ‘आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस दो हजार छब्बीस’ को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट्स) अब केवल निवेश का विकल्प नहीं रहे, बल्कि वे घरेलू बचत और वेल्थ क्रिएशन (संपत्ति निर्माण) का एक मुख्य माध्यम बनकर उभर रहे हैं। इस बात की पुष्टि वित्तीय आंकड़ों से भी होती है; सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में घरेलू वित्तीय बचत की हिस्सेदारी वित्त वर्ष दो हजार तेईस के लगभग बीस प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस में इक्कीस दशमलव सात प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव भारतीय परिवारों की निवेश आदतों में आए एक बड़े और ढांचागत सुधार को दर्शाता है, जहाँ पारंपरिक बचत के बजाय लोग बाजार-लिंक्ड वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।
सेबी प्रमुख ने बाजार की इस अभूतपूर्व वृद्धि के कई ठोस आंकड़े प्रस्तुत किए, जिसके तहत भारतीय प्रतिभूति बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या सालाना बीस प्रतिशत से अधिक की रफ्तार से बढ़ते हुए अब चौदह करोड़ पचास लाख के पार पहुंच गई है। इसके साथ ही, पिछले एक दशक में म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियां (एसेट्स) बारह लाख करोड़ रुपये से कई गुना बढ़कर अस्सी लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई हैं। वित्त वर्ष दो हजार छब्बीस के दौरान बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसमें तीन सौ छियासठ आईपीओ के माध्यम से लगभग एक दशमलव नौ लाख करोड़ रुपये जुटाए गए और कुल इक्विटी जारी करने का आंकड़ा चार दशमलव पांच लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। चेयरमैन पांडे ने भरोसा दिलाया कि सेबी का मुख्य ध्यान ‘इष्टतम विनियमन’ (ऑप्टिमम रेगुलेशन) पर है, जो बाजार के विकास और सुगमता के साथ-साथ निवेशकों की सुरक्षा और उनके अटूट विश्वास को बनाए रखने के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित करता है।
