रांची सदर अस्पताल में 13.45 करोड़ रुपये की लागत से बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की जाएगी। इस यूनिट के शुरू होने से थैलेसीमिया, रक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा रिम्स और रिनपास के लिए भी अनुदान राशि को मंजूरी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस फंड का उपयोग रिम्स से जुड़े संस्थानों के विकास कार्यों के साथ-साथ मुख्यमंत्री निश्शुल्क डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलॉजी जांच योजना और मुख्यमंत्री निश्शुल्क सर्वाइकल कैंसर व ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग योजना के लिए किया जाएगा।
इससे पहले रिम्स को 497.52 करोड़ रुपये का सहायता अनुदान मिल चुका है। इसमें 125 करोड़ रुपये मशीनों, उपकरणों, दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद पर खर्च किए गए थे, जबकि बची हुई राशि डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए निर्धारित थी।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने रिनपास को भी सहायता अनुदान के तौर पर 25 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके साथ ही रांची सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के नवीनीकरण के लिए 36.63 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
इसके अलावा विभाग ने 39 हजार सहिया को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने के लिए 54.16 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों को आवंटित किए हैं। इस राशि से सहिया साथी और स्वतंत्र साधन सेवी को भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
सदर अस्पताल में तैयार होगी बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सुविधा
राज्य सरकार ने बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना और संचालन के लिए 13.45 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, यह राशि यूनिट तैयार करने और इसे संचालित करने में इस्तेमाल की जाएगी।
फिलहाल रांची सदर अस्पताल में क्लिनिकल हेमेटोलॉजी यूनिट संचालित हो रही है, जहां हर साल एक्यूट ल्यूकेमिया और लिम्फोमा से पीड़ित करीब 100 से 150 बच्चों और वयस्कों का इलाज किया जाता है।
पिछले दो वर्षों में हेमेटोलिम्फाइड कैंसर से पीड़ित लगभग 150 से 200 नए मरीज इलाज के लिए पंजीकृत किए गए हैं। इनमें बच्चों में 50 से 60 प्रतिशत और वयस्कों में करीब 30 प्रतिशत तक इलाज सफल होने की उम्मीद जताई गई है।
ऐसे मरीजों के लिए बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। बीमारी दोबारा लौटने वाले करीब 15 से 20 प्रतिशत बच्चों को भी स्टेम सेल प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धति से लाभ मिल सकेगा।
झारखंड में थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन से जुड़ी बीमारियों का प्रसार अधिक है। ऐसे मरीजों और बच्चों के लिए बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक प्रमुख इलाज विकल्प है। सदर अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने के बाद थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर, ए-प्लास्टिक एनीमिया, लिम्फोमा और अन्य रक्त संबंधी बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा।
इस परियोजना के लिए स्वीकृत राशि में से 4 करोड़ रुपये सदर अस्पताल के संबंधित हिस्से के जीर्णोद्धार, मरम्मत और रंगाई-पुताई के कार्यों में खर्च किए जाएंगे, जबकि 9 करोड़ रुपये मशीनों और उपकरणों की खरीद पर लगाए जाएंगे।
आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज से अस्पताल को प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल मानव संसाधन की व्यवस्था में किया जाएगा। इसमें डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की आउटसोर्स सेवाएं भी शामिल होंगी।
