अवैध कारतूस की मिनी फैक्ट्री का संचालन व कारतूस बनाने के मास्टर माइंड फेनहारा थानाक्षेत्र के मड़पा मोहन निवासी श्रीकांत ने कई ठिकाने बना रखे थे। सबसे अहम यह कि उसने मौत का सामान बेचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मौत का सामान कारतूस बनाने के लिए फैक्ट्री लगा रखी थी। एनएच को इस कारण से चुना था ताकि आसानी से अवैध कारतूस की बिक्री एक से दूसरे जिलों में की जा सके। चकिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार के अनुसार श्रीकांत इस पूरे कारखाने का मास्टर माइंड है। उसके खिलाफ पहले से आर्म्स एक्ट और कारतूस तस्करी के पांच मामले दर्ज हैं।
वह वर्ष 2012 में इसी मामले में मुजफ्फरपुर में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से इसने अवैध कारतूस का धंधा शुरू किया था।
पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई की सूचना पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने मौके पर पहुंच नमूना संग्रह किया। इसके बाद से गिरफ्तार बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कारतूस फैक्ट्री के निरीक्षण व बदमाशों से पूछताछ कर इस रैकेट में शामिल अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि छापेमारी टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। टीम में चकिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार, पकड़ीदयाल के चंदन कुमार, चकिया थानाध्यक्ष धर्म प्रकाश कुमार, पुलिस निरीक्षक धीरज कुमार, मेहसी थानाध्यक्ष शानू गौरव, गड़हिया थानाध्यक्ष आदित्य कुमार, मधुबन थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार पांडे, फेनहारा थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार समेत अन्य पुलिस अधिकारी एवं जवान शामिल थे।
