पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 15 अगस्त को नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेगी। राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दाशगुप्ता ने शनिवार को कोलकाता में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने और उद्योगों को गति देने के लिए व्यापक नीति लागू करने जा रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कुशल लोगों को दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाना पड़ता है। इस स्थिति को बदलने के लिए निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बंद पड़े कारखानों की जमीन के पुनः उपयोग और उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया।
उद्योग मंत्री तापस राय ने भी कहा कि सरकार वर्ष 2027 तक पश्चिम बंगाल को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल करना चाहती है। इसके लिए निवेश-केंद्रित सुधार, पारदर्शी औद्योगिक नीति और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जाएगी।
नई औद्योगिक नीति में 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से भूमि स्वीकृति की व्यवस्था होगी। साथ ही उद्योगों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) का आधार निवेश नहीं, बल्कि सृजित होने वाले रोजगार होंगे। सरकार जीआईएस आधारित डिजिटल लैंड बैंक भी तैयार करेगी, जिससे निवेशकों को उपलब्ध औद्योगिक भूमि की जानकारी आसानी से मिल सके।
सरकार पहले ही भूमि नीति में बदलाव के संकेत दे चुकी है। इसके तहत अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है, जिसे औद्योगिक विकास में बाधा माना जाता रहा है। इसके अलावा हाल ही में लागू किए गए गुंडा दमन कानून से उद्योगपतियों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
