July 8, 2026
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बेगूसराय में मंगलवार को बरौनी रिफाइनरी विस्तारीकरण परियोजना में काम करने वाले मजदूरों का आंदोलन दूसरे दिन हिंसक हो गया। मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे मजदूरों और CISF जवानों के बीच टकराव देखने को मिला।
इस दौरान रिफाइनरी गेट पर तोड़फोड़ की गई, वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। कार्यालय के सामान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए CISF जवानों ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई मजदूर घायल हो गए।
लाठीचार्ज के बाद मजदूर और आक्राशित हो गए। गुस्साए लोगों ने CISF की बोलेरो पलट दी। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
SDO, सदर-1 और 2, DSP और आसपास के थानों की पुलिस ने पहुंचकर मामले को शांत कराया, लेकिन मृतक के परिजन और कुछ मजदूर अभी भी आंदोलन पर डटे हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि अपने हक के लिए हम लड़ते रहेंगे।
मामला रिफाइनरी थाना क्षेत्र स्थित बरौनी रिफाइनरी के मुख्य गेट नंबर-1 का है। शार्प टैंक प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत एक मजदूर की मौत के बाद यह विवाद शुरू हुआ। मृतक की पहचान सबौर निवासी श्याम सुंदर पाठक के रूप में हुई है।

बताया गया कि 22 जून को काम के दौरान लोहे की पाइप गिरने से श्याम सुंदर पाठक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद परिजन जब शव लेकर रिफाइनरी गेट पहुंचे। तब कंपनी के अधिकारियों ने 48 घंटे के भीतर 17 लाख रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, श्राद्ध कर्म समाप्त होने के बाद भी मुआवजे की राशि नहीं मिली।
इसी के विरोध में मंगलवार को मृतक के परिजन और साथी मजदूर प्रदर्शन करने पहुंचे। बताया जा रहा है कि करीब 1,000 मजदूर प्रदर्शन में शामिल थे। धरना पर बड़ी संख्या में अन्य मजदूर भी पहुंच गए और काम बंद कर दिया।
लोगों का आक्रोश बढ़ता देख CISF को स्थिति नियंत्रण करने के लिए भेजा गया‌, लेकिन प्रदर्शन के दौरान गुस्साए लोगों ने बरौनी रिफाइनरी के मुख्य गेट पर तोड़फोड़ कर दी।
इसके बाद वहां तैनात CISF के जवानों ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज के बाद लोग और आक्रोशित हो गए, CISF जवानों पर पत्थरबाजी करने लगे। CISF की बोलेरो गाड़ी जैसे ही मौके पर पहुंची, गुस्साए मजदूरों ने उसे भी पलट दिया। स्थिति गंभीर होने पर जिला मुख्यालय से DSP, SDO समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात पर काबू पाया। DSP ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि, मृतक के परिजन और कुछ मजदूर अब भी धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि रिफाइनरी के विस्तारीकरण कार्य और दैनिक कार्यों के दौरान लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए सुरक्षा मानकों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाली और मुआवजा देने में लापरवाही बरतने वाली दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग की गई है।लाल बाबू ने आगे कहा, “आज जब बड़ी संख्या में मजदूर हमारे समर्थन में आ गए और प्रोजेक्ट स्थल पर काम करने नहीं पहुंचे, तो आंदोलन खत्म कराने के लिए लाठीचार्ज कर दिया गया।”

परिजनों का कहना है कि श्याम सुंदर पाठक मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण करते थे। अब उनकी मौत के बाद पत्नी और बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

लाल बाबू ने कहा, “पिछले 36 घंटे से हम लोग सड़क पर बैठे हैं, लेकिन कोई हमारी सुध लेने नहीं आया। 17 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन मिला था, लेकिन आज तक एक भी रुपया नहीं मिला।

कंपनी का कोई प्रतिनिधि मिलने तक नहीं आया। आज सभी मजदूर हमारे समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और लोगों की पिटाई की गई।”

उन्होंने कहा, “जब तक मुआवजा नहीं मिलता और मृतक के एक आश्रित को नौकरी नहीं दी जाती, तब तक हम लोग यहीं धरने पर बैठे रहेंगे। श्याम सुंदर पाठक के परिवार को जीने का सहारा मिलना चाहिए, आखिर वे अब कैसे अपना जीवन चलाएंगे?”
बरौनी रिफाइनरी की मुख्य प्रबंधक मीनाक्षी ठाकुर ने कहा कि इंडियन ऑयल की बरौनी रिफाइनरी बिहार की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था और क्षेत्रीय विकास की गौरवपूर्ण पहचान है।

यह केवल एक औद्योगिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि राज्य की तकनीकी क्षमता, लाखों परिवारों की आजीविका, स्थानीय विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है।

उन्होंने कहा कि रिफाइनरी प्रबंधन मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और उन्हें उचित सहयोग व समाधान उपलब्ध कराने के लिए श्रम कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप लगातार समन्वय कर रहा है।
मुख्य प्रबंधक ने कहा कि यह भी देखा गया है कि कुछ असामाजिक और स्वार्थी तत्व ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों का अनुचित लाभ उठाकर अनावश्यक अशांति, अव्यवस्था और तनाव का माहौल बनाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनका मुख्य उद्देश्य हिंसा सहित विभिन्न हथकंडों के जरिए डिजिटल मीडिया पर अपनी पहुंच और लोकप्रियता बढ़ाना है।
मीनाक्षी ठाकुर ने बताया कि आज, 7 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान दुर्भाग्यवश कुछ हिंसक घटनाएं भी हुईं, जिनमें सुरक्षा अवसंरचना और औद्योगिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
यह हाइड्रोकार्बन औद्योगिक प्रतिष्ठान के सुरक्षा मानकों के पूरी तरह विपरीत है और किसी आकस्मिक आपात स्थिति में दूरगामी परिणाम वाली दुर्घटना का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी परिसर की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए इस तरह की घटनाएं सुरक्षा, संचालन और सार्वजनिक हित—तीनों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

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