तृणमूल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 के पार्षद बाप्पादित्य दासगुप्ता की नाटकीय गिरफ्तारी के ठीक 24 घंटे बाद एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। इस बार वाटगंज थाने की पुलिस ने वार्ड नंबर 63 की तृणमूल पार्षद सुष्मिता चट्टोपाध्याय को एक बुजुर्ग व्यक्ति से कथित तौर पर लगभग 30 लाख रुपये की धोखाधड़ी, जबरन वसूली और जान से मारने की धमकी देने के संगीन आरोपों में गिरफ्तार किया है। इस मामले में पुलिस ने उनके एक करीबी सहयोगी सलील चट्टोपाध्याय को भी दबोचा है। 5 जून को दर्ज हुई एक लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने यह त्वरित कार्रवाई की है, जिसने कोलकाता की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है।
कोलकाता नगर निगम में भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और उगाही के मामलों को लेकर लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने अब एक बड़ा आंकड़ा खड़ा कर दिया है। सुष्मिता चट्टोपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद अब तक टीएमसी के कुल 8 पार्षद सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। इस सूची में वार्ड 101 के बाप्पादित्य दासगुप्ता, वार्ड 123 के पार्षद और बोरो-16 के पूर्व चेयरमैन सुदीप पोले, वार्ड 106 के अरिजीत दास ठाकुर, वार्ड 36 के सचिन सिंह, वार्ड 42 के महेश कुमार शर्मा, वार्ड 114 के विश्वजीत मंडल और वार्ड 39 के मोहम्मद जसिमुद्दीन शामिल हैं। इन सभी जनप्रनिधियों पर दबंगई, आर्थिक धोखाधड़ी और सिंडिकेट चलाने जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पार्षदों की इन गिरफ्तारियों के बाद जनता का भारी आक्रोश भी सड़कों पर देखने को मिल रहा है। सुष्मिता से ठीक एक दिन पहले जब पाटुली झीलपाड़ा इलाके से दुकानदारों से जबरन उगाही के आरोप में पकड़े गए बाप्पादित्य दासगुप्ता को पुलिस अदालत ले जाने के लिए थाने से बाहर निकाल रही थी, तब स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने बाप्पादित्य और उनके सहयोगी सौरभ घोष को निशाना बनाकर सरेआम अंडे फेंके, जिससे पुलिस वाहन को भी नुकसान पहुंचा। विपक्ष इन लगातार हो रही कार्रवाईयों को तृणमूल शासन में संस्थागत हो चुके भ्रष्टाचार का पुख्ता प्रमाण बता रहा है, जबकि टीएमसी के अंदरूनी हलकों में इसे राजनीतिक द्वेष का नाम दिया जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस सुष्मिता चट्टोपाध्याय से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस धोखाधड़ी के सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
