पिताओं को अक्सर अपने बच्चों का रक्षक माना जाता है, लेकिन आधुनिक समय में उनकी भूमिका सिर्फ बच्चों को चुनौतियों से बचाने तक ही सीमित नहीं होती है। आज के बदलते दौर में कई पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से उनके लिए एक बेहद व्यवस्थित और नियंत्रित माहौल तैयार करते हैं, जहाँ दिनचर्या पहले से तय होती है और उनके अनुभवों को भी बहुत सावधानी से चुना जाता है। पितृत्व की इसी बदलती हुई सोच को खूबसूरती से सामने लाते हुए एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने अपनी लोकप्रिय डिजिटल प्रॉपर्टी ‘पापा हैं न’ के तहत एक नया डिजिटल वीडियो कमर्शियल यानी डीवीसी जारी किया है। यह नई डिजिटल फिल्म एक ऐसे पिता की मर्मस्पर्शी कहानी बयां करती है, जो यह गहराई से महसूस करता है कि बच्चे को भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार करने का असली मतलब उसे हर चुनौती से बचाना नहीं है, बल्कि उसे खुद अपने पैरों पर जीवन की राह पर चलना सिखाना है।
डिजिटल फिल्म के इस खास लॉन्चिंग अवसर पर बोलते हुए एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के चीफ ऑफ ब्रांड, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और सीएसआर, श्री रवींद्र शर्मा ने आधुनिक समाज में पिताओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के दौर में पितृत्व के मायने बहुत तेजी से बदल रहे हैं। अब पिता केवल एक सुरक्षा कवच की तरह काम नहीं करते, बल्कि वे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए मानसिक रूप से सुदृढ़ करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कंपनी को पूरी उम्मीद है कि यह भावनात्मक वीडियो अभियान देश भर के अभिभावकों को गहराई से प्रेरित करेगा और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक नई तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देगा।
