August 19, 2026
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परमाणु ऊर्जा के लिए उन्नत सामग्री पर विशेषज्ञ व्याख्यान, 200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
जमशेदपुर। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), जमशेदपुर चैप्टर की ओर से सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर के सहयोग से सोमवार को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग होने वाली सामग्रियों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञ तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया गया। बर्मामाइंस स्थित सीएसआईआर-एनएमएल सभागार में आयोजित कार्यक्रम का विषय “स्टेटस एंड ट्रेंड्स इन मैटेरियल्स फॉर न्यूक्लियर एप्लीकेशंस” था।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स के अध्यक्ष तथा न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स (एनएफसी) के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी डॉ. कोमल कपूर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी, आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के चेयरपर्सन डॉ. अतनु रंजन पाल, सीएसआईआर-एनएमएल के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस. शिव प्रसाद और डॉ. रघुवीर सिंह, आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के पूर्व चेयरपर्सन डॉ. ए.एन. भगत, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर डॉ. टी. भास्कर तथा टाटा स्टील के चीफ, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एंड इंप्लीमेंटेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तनमय भट्टाचार्य सहित कई वैज्ञानिक, अभियंता, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे।

आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के चेयरपर्सन डॉ. अतनु रंजन पाल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने चैप्टर की तकनीकी एवं व्यावसायिक गतिविधियों और विभिन्न पहलों की जानकारी दी। सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने मुख्य वक्ता का परिचय कराया और कहा कि विशेषज्ञों के नियमित तकनीकी व्याख्यान से शोध संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूती मिलती है।

अपने व्याख्यान में डॉ. कोमल कपूर ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग होने वाली सामग्रियों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और उभरती तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परमाणु संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को अत्यधिक तापमान, विकिरण, संक्षारण और लंबे समय तक संचालन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सामग्री की मजबूती, संरचनात्मक अखंडता, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के भविष्य के लिए उन्नत सामग्रियों के विकास, निरंतर शोध और स्वदेशी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. कपूर ने कहा कि सुरक्षित, विश्वसनीय और टिकाऊ परमाणु तकनीकों के विकास में मटेरियल साइंस एवं इंजीनियरिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में 200 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने परमाणु सामग्रियों, नई तकनीकों और परमाणु ऊर्जा के भविष्य से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे।

कार्यक्रम का संचालन आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के सचिव डॉ. गोपी किशोर मंडल ने किया। उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ. कोमल कपूर सहित सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग करने वाले अधिकारियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने डॉ. संदीप घोष चौधरी, डॉ. अतनु रंजन पाल, डॉ. चिरदीप घोष और डॉ. ललित मीणा के सहयोग की विशेष सराहना की।

कार्यक्रम ने धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शोध, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तकनीकी संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

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