June 6, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो दर को पांच दशमलव दो पांच प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और अपने तटस्थ रुख को बनाए रखने के निर्णय को बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों ने एक बेहद संतुलित और विवेकपूर्ण कदम बताया है। मुंबई से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकरों का मानना है कि यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों के वैश्विक माहौल के बीच भारतीय बाजार में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सोच को दर्शाता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन एवं भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के अध्यक्ष सी. एस. शेट्टी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) जमा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशों से उधारी और इक्विटी निवेश से जुड़े जो उपाय घोषित किए गए हैं, वे पूरी तरह समयोचित और व्यापक हैं। इन सकारात्मक कदमों से पूंजी प्रवाह में वृद्धि होगी, बॉन्ड बाजारों का विस्तार होगा, बाजार की नकदी स्थिति में सुधार आएगा और भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी।

बैंकिंग विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि इन केंद्रीय उपायों से घरेलू बाजार में नकदी के प्रवाह में सुधार होगा और रुपये की स्थिति मजबूत होगी। इस विषय पर इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हालांकि हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था इस वैश्विक दबाव में भी मजबूत जुझारूंपन दिखा रही है और नए वित्त वर्ष दो हजार छब्बीस-सत्ताईस के लिए छह दशमलव छह प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है, फिर भी पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल व ऊर्जा की ऊंची कीमतों को देखते हुए केंद्रीय बैंक द्वारा एक सतर्क रुख अपनाना पूरी तरह से उचित और व्यावहारिक कदम है।

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