June 20, 2026
BIHAR

अरका जैन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मेसी की अगुवाई में ‘रज उत्सव जमशेदपुर का आयोजन बड़े उत्साह और उमंग के साथ किया गया। यह आयोजन भेसजम– द फार्मा क्लब, सृजनम– द कल्चरल क्लब, मीडिया– द स्पोर्ट्स क्लब, भारतीय ज्ञान पीठ सेंटर फ़ॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम, वीमेन सेल एवं इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध विरासत

ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस विशेष पर्व ने यूनिवर्सिटी परिसर को परंपरा, उल्लास और रचनात्मकता के रंगों से सराबोर कर दिया। उल्लेखनीय है कि ‘रज उत्सव’ नारीत्व, प्रकृति, उर्वरा और जीवन के उत्सव का प्रतीक माना जाता है, जो भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध विरासत को दर्शाता है।

कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर चर्चा
इससे पूर्व कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसरपर अरका जैन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार-सह-निदेशक, चेयरमैन, संयुक्त रजिस्ट्रार, निदेशक- आइक्यूएसी मुख्य वित्त अधिकारी एवं स्कूल ऑफ़ फ़ार्मेसी के डीन समेत अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में अपनी जड़ों से जुड़ाव, सामाजिक समरसता और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।

विद्यार्थियों ने दी पारंपरिक व सांस्कृतिक प्रस्तुति

उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘रज उत्सव’ की आत्मा को जीवंत कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों और मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आनंद और उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और रचनात्मकता की सराहना करते हुए अधिकारियों ने आयोजन समितियों एवं क्लब सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी बढ़ावा देते हैं।

विविधता में एकता का संदेश व यादगार अनुभव

उत्सव के दौरान पारंपरिक भारतीय व्यंजनों का भी आनंद लिया गया, जिसने कार्यक्रम की खुशियों को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम का समापन मधुर पान के साथ हुआ, जो आपसी सौहार्द, शुभकामनाओं और उत्सव की भावना का प्रतीक बना। अरका जैन यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘रज उत्सव’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं के संरक्षण, नारी शक्ति के सम्मान और विविधता में एकता के संदेश को मजबूत करने वाला एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

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