टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट सेफ्टी राजीव मंगल ने कहा कि स्टील इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्ध की बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिससे संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सुरक्षा, गुणवत्ता, ऊर्जा दक्षता व पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने कहा कि इससे इंडियन स्टील इंडस्ट्री वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बन सकता है. उन्होंने टाटा स्टील में इ इलेक्ट्रि आर्क फर्नेस आधारित उत्पादन प्रणाली की दिशा में हो रही प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यूरोप में इस्पात की मांग अपेक्षाकृत स्थिर होने के कारण वहां ईएएफ आधारित उत्पादन प्रणाली की ओर धीरे-धीरे बदलाव देखा जा रहा है, जबकि भारत में इस्पात की मांग तीव्र गति से बढ़ रही है. साथ ही, पर्यावरणीय मानकों को भी लगातार अधिक कठोर बनाया जा रहा है. ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि ब्लास्ट फर्नेस और ईएएफ दोनों उत्पादन मार्गों का संतुलित विकास किया जाए, ताकि देश की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकें।
टाटा स्टील इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स की ओर से सीएसआईआर -एनएमएल व ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेसेस एसोसिएशन की ओर से एसएनटीआई में आयोजित दो दिवसीय ‘सतत गुणवत्ता इस्पात निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसक्यूएस-2026)’ का समापन हुआ. कांफें्रस में देश-विदेश से आए ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों, इस्पात उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, तकनीकी वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने स्टील निर्माण के भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया. समापन समारोह के मुख्य अतिथ टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट सेफ्टी राजीव मंगल ने कहा कि विशेष रूप से स्क्रैप आधारित मार्ग से स्टील उत्पादन में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने व गुणवत्ता आश्वासन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस व इंडक्शन फर्नेस आधारित स्टील निर्माण प्रणाली तेजी से विकसित हो रही है, ऐसे में उत्पादन प्रक्रिया में सुरक्षा, स्थिरता व गुणवत्ता नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
इस मौके टाटा स्टील लांग के चीफ क्वालिटी एश्योरेंस डा. टी भास्कर, जेमिपोल के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर डा. एस. सन्याल व आईसीएसक्यूएस-2026 के सह-सचिव डा. ए. अम्मासी भी मौजूद थे. सभी वक्ताओं ने वक्ताओं ने स्टील इंडस्ट्री में तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय जिम्मेदारी व उत्पादन दक्षता को बढ़ाने पर अपने विचार साझा किया. सम्मेलन का समापन एक फीडबैक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने आयोजन को अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक और उद्योग के भविष्य के लिए उपयोगी बताया. इस मौके पर अलग-अलग तकनीकी सत्र, मुख्य व्याख्यान और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनमें सतत विकास की चुनौतियों, स्क्रैप की गुणवत्ता सुधार, इस्पात की शुद्धता, ऊर्जा दक्षता तथा विद्युत आर्क भ_ी और इंडक्शन भ_ी आधारित उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई. कांफेंस में धातुकर्मीय प्रक्रिया नियंत्रण, डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा उत्पादन प्रक्रिया के अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया. विशेषज्ञों ने स्टील निर्माण में नवाचार व स्वचालन की भूमिका को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
