ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद को पटना सिविल कोर्ट से सोमवार को जमानत मिल गई।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले से जुड़े दोनों पक्षों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि दोनों शिक्षक हैं और उन्हें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, न कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। रौशन आनंद के अधिवक्ता रमाकांत शर्मा ने जमानत मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अदालत ने भी माना कि शिक्षकों को गुरु की तरह आचरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को मान भी लिया जाए, तब भी रौशन आनंद को इस मामले में साजिशकर्ता नहीं माना जा सकता।
वकील ने सवाल उठाते हुए कहा कि बाद में खान सर के गार्ड ने फायरिंग की बात स्वीकार की, लेकिन शुरुआती स्तर पर यह जानकारी क्यों छिपाई गई। उन्होंने कहा कि कोर्ट में इस बिंदु पर विस्तार से बहस हुई। रमाकांत शर्मा ने कहा कि अदालत का स्पष्ट अवलोकन था कि दोनों पक्ष शिक्षा संस्थान चलाते हैं, इसलिए उन्हें आपसी प्रतिस्पर्धा को स्वस्थ दायरे में रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी भी यही राय है कि शिक्षकों को किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों से दूर रहना चाहिए।
गौरतलब है कि 2 जून की रात मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान में जमकर बवाल हुआ था। इस मामले में रौशन आनंद, उनके भाई प्रिंस समेत कई लोगों को आरोपित बनाया गया था। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज की और बाद में फैजल खान उर्फ खान सर के दो गार्डों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार गार्डों के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर एफआईआर में खान सर का नाम भी जोड़ा गया। हालांकि अदालत ने 20 जून तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है।
इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब रौशन आनंद के भाई प्रिंस की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
