झारखंड सरकार ने अपात्र राशन कार्ड धारकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी उपायुक्तों को 25 अगस्त 2026 तक ‘राइटफुल टार्गेटिंग’ अभियान के तहत चिह्नित अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड निरस्त करने का निर्देश दिया है। विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा के आदेश में कहा गया है कि भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से प्राप्त केपीआई (वी-2) के आधार पर चिह्नित लाभुकों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी नौकरी (पीएफएमएस), आयकरदाता और अधिक कारोबार यानी ग्रॉस टर्नओवर वाली श्रेणी में आने वाले लाभुक झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2024 के बहिष्करण मानदंड के दायरे में आते हैं। ऐसे लाभुकों के साथ उनके परिवार के सदस्यों के राशन कार्ड भी निरस्त करने का निर्देश दिया गया है।
विभागीय आदेश के अनुसार, निदेशक के रूप में दर्ज व्यक्ति, वाहन स्वामित्व, साइलेंट बेनिफिशियरी और 18 वर्ष से कम आयु के एकल सदस्य जैसी श्रेणियों में चिह्नित लाभुकों का पहले नियमानुसार सत्यापन कराया जाएगा। जांच में यदि कोई लाभुक अपात्र पाया जाता है, तो उसके साथ पूरे परिवार के राशन कार्ड को भी निरस्त किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य सभी केपीआई संकेतकों के तहत चिह्नित लाभुकों के नाम भी 25 अगस्त 2026 तक राशन कार्ड से हटाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए सभी उपायुक्तों को अभियान की साप्ताहिक समीक्षा करने और विभाग को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी नहीं होने पर 31 अगस्त 2026 के बाद भारत सरकार संबंधित संख्या के आधार पर खाद्यान्न का आवंटन रोक सकती है। ऐसे में जिला प्रशासन को समय पर सत्यापन और अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
