February 12, 2026
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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में परासिया क्षेत्र के कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार देर रात परासिया थाना में डॉ. प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी (कांचीपुरम, तमिलनाडु) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा बनाई गई स्पेशल पुलिस टीम ने छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र के राजपाल चौक से डॉक्टर प्रवीण सोनी को देर रात गिरफ्तार कर लिया। इसी डॉक्टर ने बच्चों को घातक कफ सिरप लिखा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीएमओ डॉ. अंकित सल्लाम की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है।

दरअसल, शनिवार को तमिलनाडु से कफ सिरप के सैंम्पलों की जांच प्राप्त हुई थी। कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा अधिक होने की पुष्टि के बाद बीएमओ डॉ. सल्लाम की शिकायत पर पुलिस ने डॉक्टर प्रवीण सोनी और कंपनी के खिलाफ बीएनएस धारा 276 (औषधियों में मिलावट),बीएनएस धारा 105(3) (आपराधिक मानव वध) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 27(ए)(iii) और 26 के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके बाद शनिवार देर रात पुलिस ने कफ सिरप लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया है।

बीएमओ डॉ. सल्लाम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने डॉक्टर और कंपनी के खिलाफ जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक साक्ष्यों के अनुसार, जिस दवा का उपयोग बच्चों के उपचार में किया गया, उसके नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए थे। जिसकी रिपोर्ट में दवा को एडलट्रेडेट यानी मिलावटी पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर ही एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से ले रहा है। बच्चों की मौत की सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दोनों स्तरों पर जांच चल रही है। यदि और किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों से अपील है कि बिना डॉक्टरी सलाह के सिरप न दें।

गौरतबल है कि परासिया विकासखंड में किडनी फेल होने से अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है और अभी कई बच्चों का अस्पताल में उपचार जारी है। इनमें एक से पांच साल तक के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार हुआ था। सभी बच्चे बाल रोग चिकित्सक डॉ.प्रवीण सोनी के क्लिनिक में पहुंचे थे। डॉक्टर ने कई बच्चों को कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया था। बच्चों ने दवाई पी और बुखार उतर गया, खांसी ठीक हो गई, लेकिन दो दिन बाद पेशाब बंद हो गई। परिवारवालों ने छिंदवाड़ा से लेकर नागपुर तक इलाज करवाया, लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई। आरोप है कि बच्चों की ऐसी हालत डॉक्टर की लिखी कफ सिरप से हुई, जिसे चार साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं देनी थी।

मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 बच्चों की मौतों को दुखद बताते हुए 4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

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