देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। योजना के तहत अब तक करीब 59 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं और इन खातों में जमा राशि बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि देश के करोड़ों लोग अब बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में इस योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के हर परिवार को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ना था, खासकर उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना था, जो अब तक इससे दूर थे। योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की सुविधा दी गई, जिससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिला। जन-धन योजना को भारत में वित्तीय समावेशन की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक माना जाता है। इस योजना के जरिए ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बैंक खाते, रुपे डेबिट कार्ड, बीमा सुविधा और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने लगा। पहले कई सरकारी योजनाओं का पैसा लाभार्थियों तक पहुंचने में बिचौलियों की भूमिका रहती थी। जन-धन खातों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था के कारण अब सरकार सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसा भेज सकती है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या लगातार बढ़ती गई है। अब यह आंकड़ा 59 करोड़ के पार पहुंच चुका है। इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं के खातों की है। सरकार का कहना है कि इस योजना ने उन लोगों को भी बैंकिंग से जोड़ा है, जो पहले आर्थिक व्यवस्था से बाहर थे। बैंक खाते होने से लोगों में बचत की आदत बढ़ी है और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी हुई है।
