आयोडीन के पर्याप्त सेवन के महत्व को रेखांकित करने वाली एक नई जागरूकता पहल के अनुसार, आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों से निपटने के साथ-साथ मातृ स्वास्थ्य, बच्चों के दिमागी विकास और समग्र तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने में आयोडीन युक्त नमक भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इंडिया आयोडीन सर्वे 2018-19 में पाया गया कि लगभग 76.3 प्रतिशत भारतीय परिवार पर्याप्त रूप से आयोडीन युक्त नमक का सेवन करते हैं, जिसमें कम से कम 15 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) आयोडीन मौजूद होता है। हालांकि, इसके प्रति जागरूकता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, जहां केवल 22.4 प्रतिशत परिवारों को ही आयोडीन युक्त नमक के सेवन के वास्तविक लाभों की सही समझ है।
थायरॉयड हार्मोन के उत्पादन के लिए आयोडीन आवश्यक है और गर्भावस्था व शुरुआती बाल्यावस्था के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए इसकी अनुशंसित मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा, बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों के दौरान पर्याप्त आयोडीन का सेवन बेहद महत्वपूर्ण होता है, जो मस्तिष्क और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) विकास का एक अहम दौर है।
1983 में भारत के पहले राष्ट्रीय ब्रांडेड आयोडीन युक्त नमक के रूप में पेश किए गए ‘टाटा नमक’ (Tata Salt) ने देश भर के घरों में आयोडीन युक्त नमक को सुलभ बनाने के प्रयासों में प्रमुख भूमिका निभाई है।
कंपनी ने कहा कि आयोडीकरण पर उसका निरंतर ध्यान आयोडीन की कमी को कम करने और भारत की पोषण संबंधी जरूरतों का समर्थन करने के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों के अनुरूप है, जो एक आम घरेलू उत्पाद को देश के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और कल्याण में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
