August 14, 2026
JAIPUR

शहर में हत्या, लूट, चेन स्नैचिंग, रंगदारी, हथियारबाजी और नशे से जुड़े मामलों को लेकर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने चिंता जताई है। संगठन ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपराध नियंत्रण के लिए 90 दिनों की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। जेएचआरसी के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि अपराध होने के बाद गिरफ्तारी और कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिसिंग ऐसी होनी चाहिए, जिससे अपराध होने से पहले ही अपराधियों में कानून का भय पैदा हो। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण की समीक्षा केवल थाना स्तर तक सीमित न रहकर डीएसपी, एसपी और एसएसपी स्तर तक होनी चाहिए। जेएचआरसी ने पुलिस प्रशासन के समक्ष तीन चरणों में 90 दिन की कार्ययोजना रखने की बात कही है। पहले 30 दिनों में अपराधियों की निगरानी, अवैध हथियार व नशे के खिलाफ अभियान और अपराध प्रभावित इलाकों में विशेष गश्त की मांग की गई है। 60 दिनों के भीतर गंभीर लंबित मामलों की समीक्षा, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करने की मांग है। वहीं 90 दिनों के बाद थाना-वार अपराध नियंत्रण रिपोर्ट सार्वजनिक कर पुलिस अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने की बात कही गई है।

मनोज मिश्रा ने कहा कि केवल अधिकारियों का तबादला जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता। यदि निर्धारित अवधि में अपराध नियंत्रण के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने आईजी/एडीजी स्तर पर स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था और अपराध नियंत्रण रिपोर्ट कार्ड जारी करने की भी मांग की।‘जब जनता पर हर डेडलाइन लागू है तो पुलिस की भी जवाबदेही तय हो’ मनोज मिश्रा ने कहा कि वाहन का इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र या ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर आम लोगों पर नियमों के तहत कार्रवाई और जुर्माना होता है। ऐसे में जनता के टैक्स से संचालित पुलिस व्यवस्था के लिए भी अपराध नियंत्रण की स्पष्ट समय-सीमा और जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 90 दिनों के बाद भी यदि किसी क्षेत्र में गंभीर अपराधों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगता है तो खानापूर्ति के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर की पहचान अपराध और भय से नहीं, बल्कि विकास, शांति और सुरक्षित वातावरण से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “जनता अमन-चैन से जीना चाहती है। अब जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें अपराध होने के बाद कार्रवाई के बजाय अपराध होने से पहले ही अपराधी कानून से डरें।” कार्यक्रम में श्याम लाल, जग्गानाथ महंथी, बिनोद कुमार, एसके बसु, अभिजीत चंदा, संतोष कुमार, हरदीप सिद्धू, सलावत महतो, रेणु सिंह, शिशिर डे, स्नेहा चंद्रवंशी समेत संगठन के कई सदस्य उपस्थित थे।

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