भागलपुर में बाढ़ का असर अब सिर्फ घरों, सड़कों और संपर्क पथों तक सीमित नहीं रह गया है. त्योहारों से ठीक पहले इसका सीधा असर शहर के कारोबार पर पड़ने लगा है. दुर्गा पूजा से लेकर दीपावली तक जिस समय भागलपुर का बाजार सबसे ज्यादा गुलजार रहता है, उसी समय बाढ़ ने बाजार तक पहुंचने और यहां से माल बाहर भेजने की राह मुश्किल कर दी है. जिले के कई संपर्क पथों के खराब होने से ट्रांसपोर्टरों को परेशानी होने लगी है. बाहर से माल मंगाने में दिक्कत है और भागलपुर के थोक बाजार से आसपास के जिलों और झारखंड के इलाकों में माल भेजना भी आसान नहीं रह गया है. कारोबारियों को आशंका है कि अगर जल्द आवागमन सामान्य नहीं हुआ, तो त्योहारों का सीजन उनके पूरे साल के कारोबार पर भारी पड़ सकता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि भागलपुर का थोक बाजार केवल शहर तक सीमित नहीं है. यहां से कपड़ा, जूता-चप्पल, चूड़ी-शृंगार सामग्री, खिलौने, किराना समेत कई तरह का सामान आसपास के जिलों और झारखंड के बाजारों तक जाता है. सड़क संपर्क कमजोर होने का असर इसलिए थोक कारोबार के साथ खुदरा दुकानदारों और अंततः ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. दुर्गा पूजा से पहले भागलपुर बाजार के तीन ओर का इलाका बाढ़ से प्रभावित है. कारोबारियों के लिए यह समय साल की बड़ी कमाई का होता है, लेकिन इस बार उनके सामने माल की आवक-जावक की समस्या खड़ी हो गयी है.
भागलपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन चौधरी के अनुसार, व्यवसायी सालभर दुर्गा पूजा और दीपावली जैसे त्योहारों के सीजन का इंतजार करते हैं. कपड़ा, जूता-चप्पल, चूड़ी-शृंगार प्रसाधन और खिलौनों का इस दौरान खासा कारोबार होता है.
उनके अनुसार, नवगछिया और सुल्तानगंज क्षेत्र में माल भेजने की स्थिति काफी प्रभावित है. पीरपैंती और सन्हौला जैसे क्षेत्रों में भी माल पहुंचाने में परेशानी हो रही है. दूसरी ओर बाहर के ग्राहक भी भागलपुर के बाजार तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं. इसका असर अब ट्रांसपोर्ट कारोबार पर भी दिखने लगा है और करीब 20 फीसदी तक कारोबार प्रभावित होने की बात कही जा रही है. बाढ़ के कारण सड़कों की स्थिति खराब होने का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा. माल ढुलाई में ज्यादा समय और परेशानी होने पर परिवहन लागत बढ़ सकती है. कारोबारियों की चिंता है कि इसका असर आगे चलकर सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
यानी बाढ़ का एक असर यह भी हो सकता है कि त्योहार के समय बाजार में जिस सामान की मांग सबसे ज्यादा होती है, उसकी आपूर्ति प्रभावित हो और ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़े.
हालांकि अभी कारोबारियों की चिंता मुख्य रूप से माल की आवाजाही को लेकर है. उनका मानना है कि अगर समय रहते सड़कों को दुरुस्त कर आवागमन सामान्य करा दिया गया, तो त्योहारों के कारोबार को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. दुर्गा पूजा से ठीक पहले भागलपुर के आसपास एनएच-80 और एनएच-31 पर आवागमन प्रभावित होने से परेशानी बढ़ गयी है. दूसरी ओर हंसडीहा और अमरपुर मार्ग पर लगातार जाम की समस्या भी बनी हुई है.
ट्रांसपोर्ट के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बार में बड़ी मात्रा में माल ट्रक या अन्य वाहनों से बाजार तक पहुंचता है. सड़क मार्ग प्रभावित होने पर दुकानदारों को माल छोटे-छोटे हिस्सों में मंगाना पड़ सकता है.
कारोबारियों के अनुसार, ट्रेन इस समय एक वैकल्पिक माध्यम हो सकती है. छोटे कारोबारी ट्रेन से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सामान ला सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर माल की आवाजाही के लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का सामान्य होना जरूरी है. दुर्गा पूजा के दौरान भागलपुर बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है. किराना का कारोबार करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. रेडिमेड और अन्य कपड़ों का कारोबार 20 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है.
जूते-चप्पल का कारोबार भी 10 करोड़ रुपये से अधिक का है, जबकि खिलौनों का कारोबार करीब तीन करोड़ रुपये का बताया गया है.
यही वजह है कि कारोबारी मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है कि अगर आवागमन की समस्या बनी रही, तो 50 फीसदी से अधिक कारोबार प्रभावित होने की आशंका है भागलपुर के थोक बाजार की पहुंच करीब 200 किलोमीटर तक बतायी जा रही है. थोक कपड़ा कारोबारी और टेक्सटाइल चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया के अनुसार, भागलपुर का कारोबार झारखंड के दुमका, देवघर, गोड्डा और हंसडीहा के अलावा बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया तक फैला है.
त्योहारों के दौरान इन क्षेत्रों से भागलपुर के बाजार में मांग बढ़ती है और यहां से बड़ी मात्रा में सामान भेजा जाता है. ऐसे में सड़क संपर्क बाधित होने का असर केवल भागलपुर के दुकानदारों तक नहीं रहेगा, बल्कि इन बाजारों तक भी पहुंच सकता है भागलपुर के कारोबारियों के लिए आने वाले दिन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दुर्गा पूजा के बाद दीपावली तक लगातार खरीदारी का दौर चलता है. इस अवधि में बाजार में मांग बढ़ती है और थोक से खुदरा तक कारोबार तेज होता है.
ऐसे में बाढ़ प्रभावित संपर्क पथों की स्थिति और माल की आवाजाही आने वाले दिनों में बाजार की रफ्तार तय करेगी. फिलहाल कारोबारियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि आवागमन को जल्द सामान्य किया जाये, ताकि माल की आपूर्ति बनी रहे और त्योहारों का कारोबार पूरी तरह प्रभावित होने से बच सके.
