वित्तीय संकट से जूझ रही बिहार सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पिछले दो महीनों से रुकी हुई सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से १२,००० करोड़ रुपये के कर्ज की मांग की है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आरबीआई इस महीने के अंत तक ४,००० करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर सकता है, जबकि शेष राशि जून २०२६ तक मिलने की उम्मीद है। इस राशि का मुख्य हिस्सा राज्य के १ करोड़ से अधिक पेंशन लाभार्थियों के मार्च और अप्रैल महीने के बकाया भुगतान में उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, धन की कमी के कारण रुके हुए विकास कार्यों और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के वित्तपोषण के लिए भी इस कर्ज का सहारा लिया जा रहा है।
राज्य की इस वित्तीय स्थिति पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि खजाना खाली हो चुका है और भ्रष्टाचार की वजह से सरकार “उधार” पर चल रही है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले की घोषणाओं और ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ (MMRY) जैसी योजनाओं पर भारी खर्च के कारण खजाने पर बोझ बढ़ा है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे विकास के लिए लिया जाने वाला एक नियमित कर्ज बताया है। वर्तमान में बिहार का कुल कर्ज और देनदारियां ३.७० लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी हैं, और इस साल केवल ब्याज भुगतान पर ही लगभग ४०,००० करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
