सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर की ओर से जिज्ञासा कार्यक्रम के तहत तारापोर स्कूल, एग्रिको के कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इसमें 104 छात्रों ने भाग लिया। इनमें 47 छात्राएं और 57 छात्र शामिल थे। चार शिक्षक-शिक्षिकाओं के नेतृत्व में पहुंचे छात्रों को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और पदार्थ विज्ञान की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग में बदलना औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने और वास्तविक औद्योगिक समस्याओं के समाधान में विज्ञान की भूमिका समझने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर आईएमडीसी के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. के. गोपाला कृष्णा ने विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने धातुओं के विशिष्ट गुणों और उनके विभिन्न उपयोगों पर जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया।
वैज्ञानिक-ई डॉ. श्रीदा पी. ने सीएसआईआर और देशभर में स्थित उसकी विभिन्न प्रयोगशालाओं के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने सीएसआईआर-एनएमएल में चल रहे अनुसंधान कार्यों तथा विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए उपलब्ध संभावनाओं से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया।
प्रयोगशालाओं का किया भ्रमण
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया और सीएसआईआर-एनएमएल की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर अनुसंधान गतिविधियों को करीब से देखा। इससे उन्हें कक्षा में पढ़ाई जाने वाली वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप में समझने का अवसर मिला।
समापन सत्र में सीएसआईआर-एनएमएल के नियंत्रक प्रशासन (सीओए) जय शंकर शरण ने सतर्कता जागरूकता विषय पर व्याख्यान दिया। इसके बाद डॉ. के. गोपाला कृष्णा के संचालन में विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस शैक्षणिक भ्रमण को ज्ञानवर्धक बताते हुए वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने और अनुसंधान कार्यों को समझने के अवसर की सराहना की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना तथा उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भविष्य बनाने के लिए प्रेरित करना था।
