May 13, 2026
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इंटर में नामांकन के दौरान मनमाने तरीके से अधिक फीस वसूले जाने के विरोध में सोमवार को सिटी कालेज में छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने 2500 रुपये नामांकन शुल्क लेने का विरोध करते हुए कालेज परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सूचना मिलने पर इलाज कराने गए प्राचार्य को आनन-फानन में कालेज लौटना पड़ा। बाद में छात्रों को समझाकर शांत कराया गया, लेकिन कई छात्र नाराज होकर बिना नामांकन कराए ही लौट गए।
जानकारी के अनुसार, कालेज में इंटर नामांकन के लिए छात्रों से 2500 रुपये शुल्क लिया जा रहा था। इसे लेकर छात्रों ने विरोध जताया। अपने भाई का नामांकन कराने पहुंची छात्रा कोमल कुमारी ने कहा कि जिले के कई इंटर स्तरीय स्कूल व कालेजों में लगभग 1200 रुपये के आसपास नामांकन शुल्क लिया जा रहा है, जबकि यहां दोगुनी फीस वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि हर छात्र की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होती और गरीब परिवारों के लिए इतनी अधिक फीस देना मुश्किल है। छात्रों का आरोप था कि फीस को लेकर कालेज कर्मियों से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की। इससे नाराज छात्रों ने कर्मचारियों की कार्यशैली के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
छात्र प्राचार्य से मिलने पहुंचे, लेकिन उस समय प्राचार्य कालेज में मौजूद नहीं थे। इससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया तथा परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। छात्रों ने कालेज के अंदर जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। कई छात्रों ने नामांकन प्रक्रिया को रोककर कालेज में विरोध जताया। हंगामे की सूचना मिलते ही प्राचार्य राजेश आनंद तुरंत कालेज पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और कहा कि जिन छात्रों को फीस अधिक लग रही है, वे आवेदन दें। ऐसे आवेदनों पर एक-दो दिनों में विचार किया जाएगा। इसके बाद कई छात्रों ने शुल्क में राहत को लेकर आवेदन भी दिया।
प्राचार्य ने बताया कि कालेज निजी संस्थान होने के कारण शुल्क अन्य कालेजों की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि नामांकन शुल्क 1400 रुपये, ट्यूशन फीस 500 रुपये, डेवलपमेंट फीस 500 रुपये तथा परिचय पत्र के लिए 100 रुपये लिए जा रहे हैं। हालांकि गरीब छात्रों के आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। छात्रों ने बताया कि इस शुल्क का बोझ उनके परिवारों के लिए भारी है। कई छात्र ऐसे हैं जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और 2500 रुपये का नामांकन शुल्क उनके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। कुछ छात्र तो इस कारण कालेज में नामांकन कराने से ही हिचकिचा रहे थे।

छात्रा कोमल कुमारी ने कहा, “हमारे जैसे कई छात्र हैं जो मेहनत कर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन इतनी ज्यादा फीस देना हमारे लिए संभव नहीं है। उम्मीद है कि प्रशासन हमारी सुनवाई करेगा।” प्राचार्य राजेश आनंद ने बताया कि कालेज निजी संस्थान है और शुल्क निर्धारित करते समय इसके संचालन और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि कालेज में नामांकन शुल्क और अन्य फीस की स्पष्ट जानकारी पहले से उपलब्ध है। फिर भी छात्रों की समस्या को ध्यान में रखते हुए आवेदन प्रणाली के जरिए शुल्क में राहत देने का प्रावधान किया गया है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों और कालेज प्रशासन के बीच संवाद का अभाव विवाद को जन्म दे सकता है। प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि सभी शिकायतों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी।
छात्रों का कहना है कि अगर समय पर उनकी सुनवाई और शुल्क में संशोधन नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में नामांकन प्रक्रिया में और अधिक विरोध देखने को मिल सकता है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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