October 14, 2026
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से श्रम कानूनों के नए प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर आयोजित कार्यशाला में उद्योग जगत, श्रमिक कल्याण और कानूनी अनुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समाहित करने की प्रक्रिया उद्योगों के लिए अनुपालन व्यवस्था को सरल बनाने और कार्यस्थल पर बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर है। इसके लिए उद्योगों को समय रहते अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी होगी।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जमशेदपुर के उप श्रमायुक्त (डीएलसी) अरविंद कुमार ने सीआईआई की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर का औद्योगिक इतिहास प्रगतिशील श्रम व्यवहार और औद्योगिक सौहार्द का उदाहरण रहा है। यहां के उद्योगों ने कई ऐसे बेहतर श्रम व्यवहार अपनाए, जिन्हें बाद में औपचारिक नियमों का हिस्सा बनाया गया।
उन्होंने कहा कि 29 केंद्रीय कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समाहित करने का एक प्रमुख उद्देश्य नियामक व्यवस्था को पारंपरिक निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई से आगे बढ़ाकर ‘इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर’ यानी निरीक्षक-सह-सुविधादाता की भूमिका में विकसित करना है। इससे उद्योगों को नियमों के पालन में मार्गदर्शन देने, समस्याओं के समाधान और सहयोगात्मक कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
अरविंद कुमार ने बताया कि झारखंड सरकार राज्य के नियमों का अध्ययन और उनमें आवश्यक सुधार कर रही है। इस प्रक्रिया में प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों सहित तीनों पक्षों से सुझाव आमंत्रित कर उन्हें शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। न्यूनतम मजदूरी, कार्यस्थल पर सुरक्षा, समय पर वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करना कर्मचारियों की संतुष्टि और औद्योगिक उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है।
नए श्रम कोड के लिए तत्काल तैयारी जरूरी
सीआईआई झारखंड एमएसएमई पैनल के सह-संयोजक और हिमालय एंटरप्राइजेज के पार्टनर राजीव शुक्ला ने कहा कि नए श्रम कोड, विशेषकर वेतन संहिता और औद्योगिक संबंध संहिता, को लेकर उद्योगों को अब निष्क्रिय प्रतीक्षा की नीति छोड़कर सक्रिय तैयारी करनी चाहिए। झारखंड में ठेका श्रमिकों की बड़ी संख्या, शिफ्ट आधारित विनिर्माण व्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील कार्यों को देखते हुए कंपनियों को अपने अनुपालन की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने वेतन संरचना में भत्तों की 50 प्रतिशत सीमा जैसे बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योगों को संभावित प्रभावों का आकलन कर समय रहते आवश्यक कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने और पुराने अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और दीर्घकालिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
‘टाटा वे’ की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान
सीआईआई जमशेदपुर जोनल काउंसिल के उपाध्यक्ष और टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने स्वागत भाषण में कहा कि जमशेदपुर का लंबा औद्योगिक इतिहास इस बात का प्रमाण है कि कंपनियां और कर्मचारी संगठन आपसी सहयोग से स्थायी समाधान निकाल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समाहित करना नियमों को सरल बनाने और उनकी व्याख्या से जुड़ी अस्पष्टताओं को दूर करने का अवसर प्रदान करता है। टाटा की 100 वर्षों से अधिक पुरानी ‘टाटा वे’ परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठनों को केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमों की भावना के अनुरूप उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना चाहिए।
भटनागर ने उद्योग प्रतिनिधियों से जमशेदपुर और पूरे झारखंड के लिए संचालन उत्कृष्टता का एक मानक स्थापित करने का आह्वान किया।

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