अक्सर चलते समय पैर में चुभन, दर्द या किसी एक जगह पर सख्त गांठ जैसी महसूस होना गोखरू या कॉर्न का संकेत हो सकता है जो पैरों पर लगातार दबाव या घर्षण पड़ने की वजह से उत्पन्न होती है और शुरुआत में लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं जबकि समय के साथ यह चलने-फिरने और जूते पहनने में बड़ी परेशानी बन जाती है। बात करें कॉर्न्स होने के कारणों की तो बहुत टाइट जूते पैर की उंगलियों पर दबाव डालते हैं तो वहीं ढीले जूतों में पैर बार-बार रगड़ खाते हैं जिससे कॉर्न्स बनने की आशंका बढ़ जाती है, साथ ही हाई हील्स पहनने से शरीर का सारा वजन पैर के अगले हिस्से पर आ जाता है, पैरों की बनावट में गड़बड़ी जैसे हैमर टो या बनियन के कारण पैरों के कुछ हिस्सों पर ज्यादा दबाव पड़ता है, बिना मोजे के जूते पहनने से त्वचा और जूतों के बीच घर्षण बढ़कर स्किन मोटी होने लगती है, और लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार चलने से भी त्वचा मोटी होकर कॉर्न्स विकसित कर लेती है। घर पर इसका इलाज करने के लिए पैरों को 10 से 15 मिनट गुनगुने साबुन वाले पानी में भिगोकर सख्त त्वचा को नरम किया जा सकता है और प्यूमिक स्टोन या फुट फाइल से ऊपरी सख्त त्वचा को हल्के हाथों से साफ किया जा सकता है जबकि इसे किसी ब्लेड या धारदार चीज से काटने से बचना चाहिए, इसके अलावा रोजाना मॉइस्चराइजर लगाने और यूरिया या लैक्टिक एसिड युक्त क्रीम का उपयोग करने से त्वचा मुलायम बनती है हालांकि सैलिसिलिक एसिड वाली क्रीम या कॉर्न प्लास्टर सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए, और प्रेशर कम करने के लिए सिलिकॉन या फेल्ट के पैड लगाने के साथ-साथ सही जूते चुनने चाहिए जिनमें उंगलियों के लिए पर्याप्त जगह और अच्छी कुशनिंग हो। इस समस्या से बचाव के लिए पैरों को हमेशा साफ और सूखा रखें, नाखूनों को नियमित रूप से काटें, सही फिटिंग के जूते पहनें और यह ध्यान रखें कि दिन के बाद पैर थोड़े सूजे होने पर जूतों की फिटिंग जांचना बेहतर होता है ताकि लंबे समय तक एक ही तरह के जूते पहनने से बचा जा सके और पैरों पर दबाव कम हो।
