भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनियों में से एक, टाटा पावर ने ३१ मार्च २०२६ को समाप्त हुई चौथी तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष २०२६ के लिए मजबूत वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। मुंबई में २१ मई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने चौथी तिमाही में ८% की वार्षिक वृद्धि दर्ज करते हुए १,४१६ करोड़ रुपये का कर पश्चात शुद्ध लाभ हासिल किया है। इस तिमाही में कंपनी का राजस्व १५,९६२ करोड़ रुपये रहा, जबकि एबिटडा १०% की वार्षिक बढ़त के साथ ४,२१६ करोड़ रुपये पर पहुँच गया। यह मजबूत तिमाही प्रदर्शन रणनीतिक विस्तार और परिचालन उत्कृष्टता के कारण संभव हुआ है, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षमताओं को मजबूत करने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यदि पूरे वित्त वर्ष २०२६ की बात करें, तो कंपनी का कुल वार्षिक शुद्ध लाभ ७% बढ़कर ५,११८ करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है, जबकि वार्षिक राजस्व ६३,६८१ करोड़ रुपये और वार्षिक एबिटडा ११% की बढ़त के साथ १६,०९० करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
कंपनी के इस बेहतरीन प्रदर्शन को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं से गति मिली है, जिसमें तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में सेल और मॉड्यूल उत्पादन को तेज करना तथा ३.७ लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मील के पत्थर को पार करना शामिल है। इसके अलावा कंपनी ने भूटान में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स पर उल्लेखनीय प्रगति की है और बिजली निकासी को आसान बनाने के लिए दो प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाएं पूरी की हैं। पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान टाटा पावर ने ग्रिड को ४९.५२ बिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की, जबकि इसके डिस्कॉम ने उपभोक्ताओं को लगभग ४७.९२ बिलियन यूनिट बिजली पहुंचाई। टाटा पावर के सीईओ और प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने इस प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ये परिणाम अनुशासित विकास, परिचालन उत्कृष्टता और नए क्लीन एनर्जी एसेट्स को जोड़कर एक अधिक लचीले ऊर्जा भविष्य के निर्माण के प्रति हमारी निरंतर कोशिशों को प्रमाणित करते हैं।
