जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी कराने वालों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। मंगलूर में जहां पहले सालभर में ऐसे एक-दो मामले ही सामने आते थे, वहीं अब इनकी संख्या करीब 30 तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि यह चलन पहले मुख्य रूप से अपर क्लास तक सीमित था, लेकिन पिछले एक वर्ष में मिडिल और लोअर मिडिल क्लास के लोगों में भी जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी की मांग बढ़ी है। करीब 90 प्रतिशत मामलों में पुरुष से महिला और 10 प्रतिशत मामलों में महिला से पुरुष बनने की सर्जरी कराई जा रही है।
यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एपीएसआई) के प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. दिनेश कदम ने गुरुवार को जमशेदपुर में विशेष बातचीत में दी। वह गोलमुरी क्लब में आयोजित ईस्ट जोन प्लास्टिक सर्जन कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचे हैं। डॉ. कदम पिछले करीब 17 वर्षों से जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और अब तक 35 हजार से अधिक सर्जिकल प्रक्रियाएं कर चुके हैं।
पूरी प्रक्रिया में 4 से 5 लाख रुपये तक खर्च
डॉ. कदम ने बताया कि जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी जटिल प्रक्रिया है और इसे कई चरणों में पूरा किया जाता है। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा सभी जगह उपलब्ध नहीं है। निजी अस्पतालों में पूरी प्रक्रिया कराने पर औसतन चार से पांच लाख रुपये तक खर्च आता है।
उन्होंने कहा कि इसे केवल शरीर में बदलाव की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मरीज की जरूरत, मानसिक तैयारी, चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञों की टीम की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण होती है।
प्लास्टिक सर्जरी सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं
डॉ. कदम ने कहा कि आम धारणा के विपरीत प्लास्टिक सर्जरी केवल खूबसूरती बढ़ाने तक सीमित नहीं है। दुर्घटनाओं में कटे अंगों को दोबारा जोड़ने, गंभीर चोटों के बाद शरीर के हिस्सों का पुनर्निर्माण, जलने के उपचार, जन्मजात विकृतियों को ठीक करने और कैंसर सर्जरी के बाद प्रभावित हिस्सों के पुनर्निर्माण में भी प्लास्टिक सर्जरी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने बताया कि माइक्रोवस्कुलर सर्जरी में शरीर के एक हिस्से से टिश्यू लेकर दूसरे हिस्से में लगाया जाता है। दुर्घटना में अंग कट जाने पर छोटी-बड़ी नसों और रक्त वाहिकाओं को जोड़कर अंग को बचाने का प्रयास किया जाता है। मंगलूर में उनके विभाग में अंगों को दोबारा जोड़ने, ट्रॉमा केयर और जटिल कैंसर रिकंस्ट्रक्शन जैसी माइक्रोवस्कुलर सर्जरी की जा रही है।
आयुष्मान योजना में अलग कोड की जरूरत
डॉ. कदम ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी का दायरा व्यापक होने के बावजूद आयुष्मान भारत योजना में इस विशेषज्ञता के लिए अलग और पर्याप्त कवरेज की जरूरत है। इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है। प्लास्टिक सर्जरी के लिए अलग कोड विकसित करने का आश्वासन मिला है, लेकिन यह अभी प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी के उचित पैकेज और पर्याप्त कवरेज से गंभीर चोट, दुर्घटना, कैंसर रिकंस्ट्रक्शन और अन्य पुनर्निर्माण सर्जरी से गुजरने वाले मरीजों को लाभ मिल सकता है।
जीवन बचाने से लेकर खूबसूरती निखारने तक भूमिका
डॉ. कदम ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में प्लास्टिक सर्जरी की भूमिका लगातार विस्तृत हो रही है। कटे अंग को जोड़ने से लेकर गंभीर चोट के बाद शरीर का पुनर्निर्माण, कैंसर के बाद प्रभावित हिस्से की रिकंस्ट्रक्शन, जन्मजात विकृतियों का उपचार और एस्थेटिक सर्जरी—इन सभी क्षेत्रों में प्लास्टिक सर्जनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्लास्टिक सर्जरी आज जीवन बचाने और शरीर के पुनर्निर्माण से लेकर खूबसूरती निखारने तक चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
