पटना का जेपी गंगा पथ यानी मरीन ड्राइव अब गंगा किनारे और आगे बढ़ाने की योजना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 23 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में रोजगार मेले के समापन समारोह के दौरान 126 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर की जानकारी दी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 70 हजार करोड़ रुपये बताई गई है।मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित कॉरिडोर की शुरुआत कोइलवर से होगी और इसके बाद इसे गंगा किनारे आगे विकसित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से बिहार में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।यहां यह समझना जरूरी है कि 126 किलोमीटर मौजूदा पटना मरीन ड्राइव की लंबाई नहीं है। यह प्रस्तावित नए कॉरिडोर की लंबाई है। पटना में बना मौजूदा जेपी गंगा पथ करीब 21 किलोमीटर लंबा है।इस नए प्रोजेक्ट में करीब 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। इसमें राज्य सरकार की ओर से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है, जबकि करीब 50 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्र से जुटाने का लक्ष्य है।सम्राट चौधरी ने मौजूदा जेपी गंगा पथ का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 21 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसकी शुरुआत 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी और यह परियोजना 2025 में पूरी हुई।सरकार अब इसी मॉडल को गंगा के बड़े हिस्से तक विस्तार देने की दिशा में काम करना चाहती है। प्रस्तावित कॉरिडोर को सड़क निर्माण के साथ-साथ निवेश और रोजगार बढ़ाने वाली बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, अभी 126 किलोमीटर के इस कॉरिडोर को लेकर घोषणा और निवेश की जानकारी ही सामने आई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित परियोजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। परियोजना के पूरा होने के बाद यह बिहार में गंगा किनारे कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार दे सकती है।
