July 15, 2026
IAC -2

“सभी के लिए बीमा” हासिल करने के राष्ट्रीय उद्देश्य को सुदृढ़ करते हुए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई के अध्यक्ष श्री अजय सेठ ने एक कंज्यूमर अवेयरनेस कॉमिक बुक सीरीज का अनावरण किया है। इसका उद्देश्य बीमा साक्षरता में सुधार करना और पूरे भारत में वित्तीय सुरक्षा का विस्तार करना है। राष्ट्रीय बीमा जागरूकता दिवस पर शुरू की गई यह पहल उपभोक्ता जागरूकता और सोच-समझकर निर्णय लेने के माध्यम से कम बीमा पैठ को संबोधित करने के लिए आईआरडीएआई और जीवन बीमा उद्योग द्वारा एक समन्वित नीतिगत प्रयास को दर्शाती है |

यह कॉमिक श्रृंखला एक युवा जीवन बीमा सलाहकार, सुप्रिया के अनुभवों के माध्यम से मैरिड वीमेंस प्रॉपर्टी एक्ट, वेवर ऑफ प्रीमियम और क्रिटिकल इलनेस राइडर्स सहित प्रमुख जीवन बीमा अवधारणाओं की व्याख्या करती है। तकनीकी व्याख्याओं के स्थान पर प्रासंगिक कहानियों को शामिल करके, यह पहल विभिन्न आयु समूहों और भौगोलिक क्षेत्रों में बीमा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करती है।

इंश्योरेंस अवेयरनेस कमेटी-लाइफ यानी आईएसी-लाइफ के चेयरमैन श्री कमलेश राव ने कहा कि घरेलू वित्तीय तैयारी को मजबूत करना भारत के दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन का केंद्र है और उन्होंने ‘सबसे पहले लाइफ इंश्योरेंस’ अभियान के दूसरे चरण के तहत हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

लाइफ इंश्शोरेंस काउंसिल के महासचिव श्री आदित्य गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे क्षेत्र विकास के अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, बीमा कवरेज का विस्तार करने के लिए उपभोक्ता जागरूकता और विश्वास महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

इस लॉन्च के दौरान एक नीति-केंद्रित पैनल चर्चा “इंडिया आस्क: व्हाई प्रायोरिटाइज लाइफ इंश्योरेंस?” भी आयोजित की गई, जिसमें कमलेश राव, एलआईसी के प्रबंध निदेशक एम. दोरईस्वामी, पीएनबी मेटलाइफ के एमडी और सीईओ समीर बंसल और इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ ऋषभ गांधी शामिल थे। इसका संचालन वित्तीय पत्रकार सोनिया शेनॉय ने किया।

यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत के जीवन बीमा क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान न्यू बिजनेस प्रीमियम में सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और 2.83 करोड़ से अधिक पॉलिसियां जारी की गई हैं। हालांकि, उद्योग के नेताओं ने देखा कि बीमा की पैठ देश की आर्थिक प्रगति से लगातार पीछे चल रही है। लगभग 87 प्रतिशत के अनुमानित जीवन बीमा सुरक्षा अंतर और 18 से 35 वर्ष की आयु के लोगों में इसके 90 प्रतिशत से अधिक होने के कारण, नीति निर्माता और उद्योग हितधारक वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता विश्वास और निरंतर जागरूकता अभियानों को सार्वभौमिक बीमा कवरेज प्राप्त करने तथा भारत के दीर्घकालिक आर्थिक लचीलेपन को मजबूत करने के लिए आवश्यक मानते हैं।

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