शास्त्रीनगर थाने की पुलिस ने शिवपुरी में एक किराये के फ्लैट में छापामारी कर गेमिंग एप और ऑनलाइन सट्टेबाजी में मुनाफा का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह के पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
इनकी पहचान औरंगाबाद निवासी शशांक शेखर, मनीष कुमार, रिशु कुमार, गयाजी के सूर्यदीप राज और रोहतास निवासी सचिन कुमार के रूप में हुई। इसमें कुछ साइंस से स्नातक हैं। फ्लैट से 21 मोबाइल, आठ सिमकार्ड, लैपटॉप, डेबिड और क्रेडिट कार्ड बरामद किया गया है। इसमें कई मोबाइल और लैपटॉप में पहले से गेमिंग एप इंस्टाल किया हुआ है। यह गिरोह ऑनलाइन एप के जरिए जुआ, सट्टेबाजी और गेमिंग एप से भारत में नहीं, बल्कि अन्य कई देशों के लोगों को जाल में फंसाकर उनसे ठगी करता था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सचिवालय-2 साकेत कुमार ने बताया कि शास्त्रीनगर थानेदार रवींद्र कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर उक्त ठिकाने पर दबिश दी गई और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। गिरोह का मास्टरमाइंड की पहचान अंकित के रूप में हुई, जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। यह गिरोह बीते एक साल से सक्रिय था। फ्लैट को किराये पर लिया गया था। गिरोह कई तरीके से ठगी करता था। पहला इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर गेमिंग एप इंस्टाल कराना। उस गेमिंग एप को इंस्टाल कराने के बाद क्लाइंट को एक कोड नेम दिया जाता था। उसी कोड नेम से उनकी पहचान होती थी। शुरू में दो चार सौ रुपये मुनाफा दिया जाता था। जैसे ही लालच बढ़ता था, उससे ठगी कर लेते थे। इसी तरह आनलाइन सट्टेबाजी के जरिए जालसाली की जाती थी।
कोड नेम के जरिए बातचीत और लेन-देन किया जाता था। ऐसे तीन सौ से अधिक क्लाइंट इनके संपर्क में थे, जिनसे ठगी कर चुके थे। आइपीएल के नाम पर ही सट्टेबाजी की तैयारी चल रही थी। यह गिरोह किसी और के इशारे पर काम करता था। इनका काम लोगों को जाल में फंसाना, फिर उनके खाते से रकम को दूसरे खाते में ट्रांसफर करना था। बदले में इन्हें पहले कमीशन फिर सैलरी दी जा रही थी।
ठगी की रकम ट्रांसफर होने के बाद दूसरा गिरोह अकाउंट हैंडलर इसकी निकासी करता था और उसे मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जा रहा था। इसके साथ ही टेक्निकल सपोर्ट के लिए अलग गिरोह होता था। इससे साफ है कि इस का नेटवर्क बड़ा है और इसके कई और लोग संलिप्त है, जिनकी पुलिस पहचान कर रही है।
