यह छठी बार है कि पटना में सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ई-मेल के माध्यम से दी गई। बुधवार को एक बार फिर अफरातफरी थी। कोर्ट परिसर को बंद कर दिया गया था। धमकी को देखते हुए दानापुर कोर्ट को भी खाली करा दिया गया।
ई-मेल देखते ही कोर्ट के प्रभारी निबंधक ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
मेल मंगलवार की रात भेजा गया था, जिसे कोर्ट खुलने पर बुधवार को देखा गया। जिला अधिवक्ता संघ के सचिव को सूचना देते हुए कोर्ट परिसर खाली करने का अनुरोध किया गया। अधिवक्ता कोर्ट परिसर से बाहर चले गए। गेट पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ ही पीरबहोर थाना पुलिस, बम निरोधक दस्ता, श्वान दस्ता, एटीएस के साथ पुलिस अधिकारी भी पहुंच गए। परिसर से लेकर हरेक कमरे की तलाशी ली गई, लेकिन कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। इसके बाद न्यायालय
परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके पूर्व नौ फरवरी, आठ जनवरी और 28 जनवरी को भी पटना सिविल कोर्ट परिसर में तीन
आरडीएक्स विस्फोट की धमकी मिली थी। 28 जनवरी को बिहार के और भी कोर्ट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बम से उन्हें उड़ाने की धमकी की सूचना मिली। इसमें मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट, सिवान सिविल कोर्ट, बेगूसराय सिविल कोर्ट, भागलपुर सिविल कोर्ट आदि शामिल थे। वर्ष 2025 में 25 अप्रैल और 16 अक्टूबर को भी इसी तरह के धमकी भरे संदेश आए थे। हर बार पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर न्यायालय परिसर को खाली कराकर जांच कराई, लेकिन कहीं कुछ नहीं
मिला। बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि आखिर इसके पीछे कौन है, जिसके बारे में पुलिस अभी तक कुछ भी पता नहीं कर सकी है। मामला कोर्ट की सुरक्षा से जुड़ा है। अब तक इस मामले में पीरबहोर थाने में छह केस दर्ज किए जा चुके है। धमकी भरे ईमेल के बाद तलाशी में पुलिस गहन छानबीन का दावा करती है, लेकिन अभी तक धमकी भरा मैसेज भेजने के पीछे आरोपितों की मंशा क्या है, स्पष्ट नहीं हो सका है। बीते एक वर्ष में कोर्ट को छठी बार धमकी भरा ई-मेल मिल चुका है। अब
पुलिस माइक्रोसाफ्ट आउटलुक से संपर्क कर आइपी एड्रेस की जानकारी लेगी। आशंका है कि धमकी देने वाला वीपीएन या प्राक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर रहा हो। इस बार पुलिस ने दो घंटे में जांच प्रक्रिया पूरी कर ली, ताकि कामकाज प्रभावित नहीं हो। लेकिन, एक अधिवक्ता की मृत्यु होने के कारण दोपहर में शोकसभा की गई और इसके बाद कार्य नहीं करने का निर्णय लिया गया। जेल में बंद सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर भी सुनवाई नहीं हो सकी।
मामले की गहनता से जांच की
6 जा रही है। एटीएस के साथ ही आर्थिक अपराध इकाई से भी मदद ली जा रही है। आइपी एड्रेस के बारे पता किया जा रहा है। पूर्व में दर्ज केस की भी समीक्षा की गई है।
