March 20, 2026
bihar (2)

एक्सएलआरआई के डायरेक्टर जॉर्ज एस एसजे ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अब सप्लाई चेन केवल लॉजिस्टिक्स तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह कंपनियों की रणनीतिक ताकत बन चुकी है. आज के दौर में वही संगठन आगे बढ़ेंगे जो एजिलिटी (लचीलापन), सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) व टेक्नोलॉजी(तकनीक) के बीच संतुलन बना सकें. यह बात देश के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल एक्सएलआरआइ- जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित क्लॉकस्पीड 6.0 कॉनक्लेव के दौरान निकलकर सामने आयी।

एक्सएलआरआइ के इस वार्षिक ऑपरेशंस एंड सप्लाई चेन कॉनक्लेव में देश की बड़ी कंपनियों के विशेषज्ञों व शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया और आधुनिक सप्लाई चेन की बदलती दिशा पर गहन चर्चा की. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक फादर जॉर्ज सेबेस्टियन, एसजे ने किया. उन्होंने कहा कि आज इंडस्ट्री–एकेडेमिया कॉलबोरेशन पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है, क्योंकि असली सीख किताबों से नहीं बल्कि रियल -वल्र्ड चैलेंजेज से मिलती है। उन्होंने इस वर्ष की थीम “सिंक्रोनाइज्ड हॉरिज़न्स : इंटीग्रेटिंग एजिलिटी , सस्टेनेबिलिटी , एंड टेक ” को बेहद प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आज कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्पीड और सस्टेनेबिलिटी के बीच संतुलन बनाने की है।

कार्यक्रम में प्रो. जे. अजीत कुमार ने सप्लाई चेन की अहमियत को समझाते हुए वैश्विक संकटों, जैसे एवर गिवेन घटना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज हर कंपनी को रेसिलिएंट और एडेप्टिव सप्लाई चेन बनानी होगी. वहीं प्रो. सुनील सारंगी ने एजिल मैनिफेस्टो और थ्योरी ऑफ कॉन्स्ट्रेंट्स का जिक्र करते हुए कहा कि एजिलिटी का मतलब केवल तेज़ी नहीं, बल्कि बदलते हालात में सही निर्णय लेना है, जबकि सस्टेनेबिलिटी का अर्थ है प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *