February 10, 2026
RBI

रिजर्व बैंक के बही-खाते का आकार मार्च, 2024 तक 11.08 प्रतिशत बढ़कर 70.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यही वजह है कि केंद्रीय बैंक सरकार को अपना अबतक का सबसे ऊंचा लाभांश दे पाया है. तो मार्च, 2023 की तुलना में मार्च, 2024 तक केंद्रीय बैंक के बही-खाते का आकार 7,02,946.97 करोड़ रुपये बढ़ा है. मार्च, 2023 तक यह 63.45 लाख करोड़ रुपये था.

केंद्रीय बैंक की शुद्ध आय मार्च, 2024 के अंत तक 42,819.91 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के बाद 2.11 लाख करोड़ रुपये रही. केंद्रीय बैंक का प्रावधान पिछले वित्त वर्ष में 1,30,875.75 करोड़ रुपये रहा था. प्रावधान की गई राशि आकस्मिकता निधि (सीएफ) में स्थानांतरित कर दी जाती है.
वित्त वर्ष 2022-23 में शुद्ध आय 87,420 करोड़ रुपये थी. 2022-23 की तरह समीक्षाधीन वित्त वर्ष में परिसंपत्ति विकास कोष (एडीएफ) के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया.
भारतीय रिजर्व बैंक का बही-खाता मुद्रा जारी करने के साथ-साथ मौद्रिक नीति और रिज़र्व प्रबंधन उद्देश्यों सहित इसके विभिन्न कार्यों के अनुसरण में की गई गतिविधियों को दर्शाता है.

RBI ने 2023-24 के लिए केंद्र सरकार को 2.11 लाख करोड़ रुपये के अपने अबतक के सबसे अधिक लाभांश भुगतान को पिछले सप्ताह मंजूरी दी थी. वित्त वर्ष 2022-23 के लिए RBI द्वारा केंद्र को लाभांश या अधिशेष हस्तांतरण 87,416 करोड़ रुपये था. आखिरी बार 2018-19 में सबसे अधिक 1.76 लाख करोड़ का लाभांश दिया गया था.RBI की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बही-खाते में परिसंपत्ति पक्ष में बढ़ोतरी.. विदेशी निवेश, सोने तथा ऋण व अग्रिम में क्रमशः 13.90 प्रतिशत, 18.26 प्रतिशत और 30.05 प्रतिशत की वृद्धि के चलते संभव हुई.
देनदारियों की बात की जाए, इसमें विस्तार की वजह नोट जारी करने, जमा और अन्य देयताओं में क्रमशः 3.88 प्रतिशत, 27 प्रतिशत और 92.57 प्रतिशत की वृद्धि है.
RBI ने कहा कि 31 मार्च, 2024 तक घरेलू परिसंपत्तियां 23.31 प्रतिशत थीं. वहीं विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना (भारत में जमा और मौजूद सोना सहित) और भारत के बाहर के वित्तीय संस्थानों को दिया गए ऋण का कुल परिसंपत्तियों में हिस्सा 31, मार्च, 2024 तक 76.69 प्रतिशत था. जबकि 31 मार्च, 2023 तक यह क्रमशः 26.08 प्रतिशत और 73.92 प्रतिशत थे.

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