भारत में हर साल १६ मार्च को ‘राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य घातक बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा के रूप में टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस वर्ष २०२६ की थीम पूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने पर केंद्रित है। ऐतिहासिक रूप से, इस दिन की शुरुआत १९९५ में हुई थी जब भारत ने अपना पहला ‘पल्स पोलियो’ टीकाकरण अभियान शुरू किया था। तब से, टीकाकरण कार्यक्रमों ने चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज, सरकार का लक्ष्य सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि देश के प्रत्येक बच्चे और गर्भवती महिला को १२ निवारणीय बीमारियों के खिलाफ मुफ्त टीके प्राप्त हों।
टीकाकरण न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि ‘हर्ड इम्युनिटी’ (सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता) विकसित करने में भी मदद करता है, जो पूरे समुदाय को सुरक्षित रखती है। वर्तमान में भारत सरकार ‘मिशन इंद्रधनुष’ जैसे अभियानों के जरिए उन बच्चों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है जो नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर टीकाकरण करने से शिशु मृत्यु दर में भारी कमी आती है और लंबी अवधि में स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सकता है। डिजिटल युग में ‘कोविन’ और ‘यू-विन’ जैसे प्लेटफॉर्म टीकों के वितरण और ट्रैकिंग को और भी सुव्यवस्थित और पारदर्शी बना रहे हैं, जिससे एक स्वस्थ और सुरक्षित भारत का सपना साकार हो रहा है।
