असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक सामाजिक बदलाव की जानकारी साझा की है। गुवाहाटी से २६ मई २०२६ को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्यभर की कई ईदगाह कमेटियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं व संवेदनाओं का सम्मान करते हुए आगामी ईद-उल-अजहा के त्योहार पर स्वेच्छा से गोवंश की कुर्बानी न देने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी पवित्र धार्मिक ग्रंथ या शास्त्र में गाय की कुर्बानी देने का कोई अनिवार्य उल्लेख नहीं है, इसलिए समाज द्वारा खुद आगे बढ़कर उठाई गई यह पहल दोनों समुदायों के बीच आपसी भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस सामाजिक पहल की सराहना करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर सरकार के सख्त रुख को भी दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीनों से अवैध कब्जाधारियों को हटाने और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजने का प्रशासनिक अभियान पूरी मजबूती से जारी रहेगा, क्योंकि मूल निवासियों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों ने राज्य की १२६ में से १०२ सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिसमें अनुसूचित जनजाति और चाय बागान क्षेत्रों की सभी सुरक्षित सीटें शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यहाँ तक कि मानकाचर और पर्वतझोरा जैसे मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में भी उनके सहयोगी दलों को १ लाख से अधिक वोट मिले हैं और राज्य के कुल ढाई करोड़ वोटों में से १ करोड़ से अधिक वोट एनडीए गठबंधन को मिलना यह साबित करता है कि जनता ने उनके समावेशी विकास मॉडल और सुरक्षा नीतियों पर अपनी मजबूत लोकतांत्रिक मुहर लगा दी है।
