बिहार में मैट्रिक परीक्षा की कड़ी निगरानी और सख्त बंदोबस्त के बीच पटना के मसौढ़ी से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। देर से परीक्षा केंद्र पहुंचने पर एंट्री न मिलने से मायूस छात्रा ने अपनी जिंदगी का सफर ही खत्म कर लिया। यह सनसनीखेज हादसा पटना-गया रेलखंड पर तारेगना स्टेशन और छोटकी मसौढ़ी हॉल्ट के बीच महराजचक गांव के पास हुआ।
मृतका की पहचान कोमल कुमारी के रूप में हुई है, जो मसौढ़ी के खरजावां गांव निवासी मंटू यादव की बेटी थी। परिजनों के मुताबिक, सड़क जाम की वजह से वह बरनी स्थित परीक्षा केंद्र पर तय वक्त से कुछ देर बाद पहुंची थी। सख्त हिदायतों के चलते उसे परीक्षा हॉल में दाखिल होने की इजाजत नहीं मिली। इम्तिहान छूटने का सदमा ऐसा लगा कि वह घर लौटकर फफक-फफक कर रोती रही।
घरवालों ने उसे दिलासा दिया, लेकिन अंदर ही अंदर वह टूट चुकी थी। इसी दरमियान वह चुपचाप घर से निकली और महराजचक गांव के पास रेलवे ट्रैक पर जा खड़ी हुई। चंद लम्हों बाद गुजरती ट्रेन से टकराकर वह बुरी तरह जख्मी हो गई और लाइन किनारे जा गिरी। सूचना मिलते ही मसौढ़ी पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने यूडी केस दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक वार्षिक परीक्षा-2026 मंगलवार से शुरू हुई है। यह परीक्षा 25 फरवरी तक पटना के 70 समेत राज्यभर के 1,699 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है, जिसमें कुल 15,12,687 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। पहले दिन मातृभाषा (हिंदी, उर्दू, बांग्ला, मैथिली) की परीक्षा दो पालियों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन कई छात्र-छात्राएं देरी से पहुंचे और उन्हें सख्ती के तहत प्रवेश नहीं मिला। इम्तिहान की सख्ती ने जहां नकल पर नकेल कसी है, वहीं यह दर्दनाक हादसा व्यवस्था और संवेदनशीलता पर कई सवाल भी खड़े कर गया है।
