पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच दोस्ताना संबंध हैं और जरूरत पड़ने पर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारत को सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान भारत के जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने देगा, तो उन्होंने कहा, “हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। आप दो-तीन घंटे में ऐसा होते देखेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सहयोग और विश्वास का संबंध रहा है।
इसी बीच ओमान के सोहर (Sohar) शहर में ड्रोन से जुड़े एक हादसे में दो भारतीय कामगारों की मौत हो गई। भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस घटना में 11 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 भारतीय नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बलों ने एक ड्रोन को मार गिराया था, जिसके बाद उसका मलबा गिरने से यह हादसा हुआ।
विदेश मंत्रालय के गल्फ डिवीजन के अधिकारी असीम महाजन ने कहा कि घटना मस्कट के पास स्थित सोहर क्षेत्र में हुई। भारतीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनी के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि घायल भारतीयों को आवश्यक सहायता मिल सके।
उधर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनका एक पैर काटना पड़ा और उनके लिवर को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद 9 मार्च को देश का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था।
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी टकराव के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य—जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है—को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
भारत के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भारत के आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इसलिए ईरान का यह बयान भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
