कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेश सोंथालिया ने कहा कि एफएसएसएआई की ओर से स्थायी लाइसेंस देने का निर्णय पीएम मोदी के सुधारवादी विजन को दर्शाता है.ङ यह सरकारी नियामकीय सुधारों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कदम के तहत केन्द्र सरकार ने देश में पहली बार व्यापारिक समुदाय पर अनुपालन के बोझ को कम करने व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से स्थायी लाइसेंस देने की पहल की है।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा के मार्गदर्शन में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथलिटी ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि अब खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाइसेंस स्थायी आधार पर दिए जाएंगे और इसके लिए समय-समय पर नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी. उन्होंने कहा कि ये बड़े सुधार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन के अनुरूप हैं जिसके तहत नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापारियों, छोटे उद्यमियों व स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पारदर्शी व व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हर वर्ष या समय-समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण करना लंबे समय से एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और कई बार इसमें देरी व भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी पैदा हो जाती थीं।
स्थायी लाइसेंस की नई व्यवस्था ऐसे सभी अवरोधों को समाप्त करेगी व खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए अनुपालन को काफी सरल बनाएगी. उन्होंने कहा कि संशोधित ढांचे के तहत 50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए राज्य लाइसेंस आवश्यक होगा, जबकि 50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए केन्द्रीय लाइसेंस लागू होगा, जिससे लाइसेंसिंग व्यवस्था और अधिक सरल करने का प्रयास है।
