February 10, 2026
delhi_air_pollution_1761447709761_1761447709913

6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में एक प्रस्तावित “बाबरी मस्जिद” के कथित शिलान्यास समारोह को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सस्पेंड किए गए तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने कार्यक्रम से पहले घोषणा की कि सऊदी अरब से दो इमाम इस समारोह में शामिल होंगे, जिससे बड़ी भीड़ जमा हुई और इसे काफी पब्लिसिटी मिली।

कार्यक्रम के बाद पता चला कि मंच पर मौजूद दोनों इमाम विदेशी नागरिक नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। उनकी पहचान मुर्शिदाबाद जिले के दौलताबाद के कारी सूफिया और पूर्वी मेदिनीपुर के शेख अब्दुल्ला के रूप में हुई, जिससे धार्मिक समुदाय के कुछ हिस्सों में कड़ी आलोचना हुई।

कई धार्मिक नेताओं ने आयोजकों पर लोगों को गुमराह करने और धार्मिक भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी काफी असंतोष देखने को मिला, जिसमें कई लोगों ने कार्यक्रम से पहले किए गए दावों पर सवाल उठाए।

आरोपों का जवाब देते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि उन्हें एक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सऊदी मेहमानों को लाने के लिए एक बिचौलिए को काम सौंपा था और उनके यात्रा और रहने का खर्च भी दिया था, लेकिन बाद में पता चला कि सऊदी अरब से कोई नहीं आया था। बिचौलिए खांडकर यूसुफ ने स्वीकार किया कि आखिरी समय में विदेशी मेहमानों को लाना संभव नहीं था और कहा कि भीड़ के कारण वह मंच से इस मामले को साफ नहीं कर पाए। कबीर ने इस पूरे मामले के पीछे राज्य मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी का हाथ होने का आरोप लगाया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *