बिहार के दरभंगा में इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखा में हुए दो करोड़ के लोन फ्रॉड में साइबर थाना पुलिस ने सहायक बैंक मैनेजर रवि राघवेंद्र को गिरफ्तार किया है। तत्कालीन शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा समेत दो आरोपी फरार हैं। रविश फिलहाल अरवल में तैनात हैं। पुलिस के अनुसार अधिकारियों ने मजदूरों के दस्तावेज का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से लोन निकाल लिए और सरकारी अनुदान राशि की हेराफेरी की। इसके पीछे संगठित गिरोह का हाथ बताया गया है, जिसमें बैंक अधिकारियों, उद्योग विभाग के कर्मी और बिचौलियों की मिलीभगत है। पुलिस जांच में पता चला है कि रवि राघवेंद्र फर्जी तरीके से 14 खातों का संचालन कर रहा था। कुशेश्वरस्थान थाने के केवटगामा निवासी राज किशोर राय ने केस दर्ज कराया तब मामले का खुलासा हुआ। राज किशोर के मुताबिक, उन्हें लोन नहीं मिला था पर बैंक अधिकारी 18 लाख रुपये के लोन की किस्त मांगने पहुंच गए। उनके नाम मिठाई दुकान दिखाकर लोन पास किया गया था। इंडियन ओवरसीज बैंक की दरभंगा शाखा में दो करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में पुलिस ने सबसे पहले आरोपी विपिन पासवान को गिरफ्तार किया। उसके घर से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, लोन पेपर और फर्जी कंपनियों के कागजात मिले। पूछताछ में खुलासा हुआ कि विपिन और उद्योग विभाग में कार्यरत उसके गांव के कृष्णा पासवान ने मिलकर बैंक अधिकारियों के साथ साजिश रची। सहायक प्रबंधक रवि राघवेंद्र फर्जी रिपोर्ट तैयार कर लोन पास कर देता था। साइबर डीएसपी बिपिन बिहारी ने बताया कि ये सभी लोन प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना के तहत लिए गए थे, जिसमें कम ब्याज दर और 50 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलता है। लोन की राशि पहले विपिन के एक्सिस बैंक के करंट अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। बैंक स्टेटमेंट की जांच में चार महीनों में करीब दो करोड़ के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है। यह पैसा आगे एक चमड़े के बैग बनाने वाली कंपनी में ट्रांसफर किया गया, जो जांच में बंद पाई गई। डीएसपी ने बताया कि इस गिरोह में अब तक चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। विपिन पासवान और सहायक प्रबंधक रवि राघवेंद्र गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि उद्योग विभाग का कर्मी कृष्णा पासवान फरार है। वहीं, उस समय के शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा (वर्तमान पोस्टिंग अरवल) फरार चल रहे हैं। जब राज किशोर ने सहायक प्रबंधक से जानकारी मांगी थी तो मामले को दबाने के लिए बिचौलिये के माध्यम से तीन लाख रुपये देने और बाद में 70 लाख का अनुदान दिलाने का लालच भी दिया गया था। पुलिस अब उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से डाटा जुटा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले की जड़ें और कहां तक फैली हैं। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
